देने और यह कहेंगे कि तब आप भारानले जा सकते हैं। इन वहाँ आपने लड़नेवाले नहीं हैं । बादमें में पाकिस्तान भी नामूँगा । लेकिन सुलके लित्रे पाकिस्तान सरकारको मुझे कहना है कि तू आता है और अपना काम कर चता है । नगर पाकिस्तानको मेक भी की हुकूमत से बुलायेगी, तो भीमे चला नामूँगा । भाषावार प्रान्त वत्र अब कास कार्यन्वनितिकी बैठक मेरो हाजरीन होती है, तब तब ने आपको के बारेमें कुछ न कुछ बता देता है। आज समितिको दूसरी बैठक हुमी और ने काफी बातें हुआ। तब का तो जारी दिल्ली भी नहीं होगी, लेकिन ये बात आपको बताने लायन है । असने २० सालसे यह तय कर लिया था कि देव जितनी बड़ी भाषाएँ हैं, सुत्ने प्रान्त होने चाहियें । कामेने यह मी कहा था कि हुकूमत इनारे हायनें आते ही उसे प्रान्त बनाये जायेंगे । वैसे तो माज भी ९ या १० प्रान्त बने हुके हैं और वे अक नरके नाहत हैं । जिसी तरह नगर नये प्रान्त बनें और दिल्लीके मातहत रहें, तो कोणी ही गव नहीं । लेकिन वे त अल-मलन होकर भाव हो पायें और मे रहें, तो फिर वह नेत्र निकम्मी बात हो प्रान्त बनने के बाद है यह न समझ लें कि सम्बन्ध नहीं, महाराष्ट्रका बनोट नहीं और कर्नाटक आन्द्रले केली सम्बन्ध नहीं । दव तो हमारा काम बिगड़ जाता है । नितलित आप भाभी मानी उनसे। जिसके अलावा, भाषावार प्रान्त बन जाते हैं, तो प्राचीन मायानोंकी भी दरक्की होती है । बहे लोगों हिन्दुस्तानीनें तालोन देना वाहियात बात है और रेमी है। नरके मातहत न जाती है। अलग जी नहाराष्ट्ने कोली सीमा कमीशनको अरूरत नहीं देना अब सीनाबन्दी कमीशनोंकी रात तो हमें भूल छानो चाहिये । आपने मिलकर नको बना और सुन्हें पंडित जवाहरलालजी ३९२
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