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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/४१२

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सामने रख दें। वे हुकूमतकी तरफसे झुनपर दस्तखत दे देंगे । वास्तवमें शिक्षीका नाम से भानावरी है । अगर आप केन्द्रीय सरकारको सीमा तब करने के लिये कहें, तब तो काम बहुत कठिन हो जायगा । १३६ २६०१२४८ आज़ादी- दिन आज २६ जनवरी, स्वतंत्रता दिन है । जय तक हमारी प्राचानीकी लगभी जारी थी और आजादी हमारे हाथमें नहीं भाभी जी, तब तक मिसका झुत्सन मनाना अरुर मानी रखता था । किन्तु अम आजादी हमारे हाथमें आ गओ है और हमने मिसका स्वाद बखा है, तो हमें लगता है कि आजादीका हमारा स्वप्न भेक भ्रम था, के कि अब गलत सावित हुआ है । कमसे कम मुझे तो सा लगा है । डी आज हम किस श्रीजका सत्सव मनाने बैठे हैं । हमारा भ्रम पलत साबित हुआ जिसका नहीं । मगर हमारी किस आशाका लुत्सव मनानेका हमें जरूर हक है कि कालीसे काली घटा अथ टक गी है और इस खुस रास्तेपर है, जिसपर आते-आते हुभे तुच्छसे तुच्छ ग्रामवासीकी गुलामीका अन्त आयेगा और वह हिन्दुस्तानके शहरोंका दास बनकर नहीं रहेगा, बल्कि बेहातोंके विचारमय शुद्योगोंके मालकी निशान्ति और विकीके लिये शहरके लोगोंका छुपयोग करेगा 1 वह यह सिद्ध करेगा कि वह सचमुच हिन्दुस्तानकी भूमिका बायका है । जिस रास्तेपर आगे जाते हुमे अन्तमें सब वर्ग और सम्प्रदाय मेक समान होंगे । यह हर्गिज न होगा कि बहुसंख्या अल्पसंख्यापर - चाहे वह कितनी ही कम या इच्छ क्यों न हो - अपना प्रभुत्व लगाये या मुसके प्रति मूंच-नीच का भाव रखे। हमें चाहिये कि अ आशा फलीभूत होनेमें हम ज्यादा देरी न होने दें, जिससे लोगोंके दिल सट्टे हो जायें । ३९३