नहीं, पर सुनकी आँखों परसे में समझ गया। पाकिस्तानमें जो कुछ हुआ, सुसका हिसाब देना हमारी हुकूमतका काम है। खुसका काम वह जाने । हमारा काम तो यहीं है कि अक दूसरेका दिल साफ करनेकी जो क्सम हमने खाओ है, मुझे कायम रखें, और सुसपर अमल करें । अजमेरके हरिजन 1 अमी अजमेरमै राजकुमारी बढ्न चली गऔं थीं । अन्होंने वहाँकी क खतरनाक और हमारे लिये व शरमकी बात सुनाओ। वहाँ जो हरिजन रहते हैं, खुनसे वहीँवाले काम देते हैं और वे करते हैं। मगर जिस जगह वे रहते हैं, वह बहुत गंदी और मैली है । वहाँ तो हमारी ही हुकूमत है और अच्छी खासी हुकूमत है । यहाँ हिन्दू और सिक्स अमलदार भिसी हुकूमतके मातहत काम करते हैं। क्या न्हें खयाल नहीं आता कि भैसा शरमका काम हम कैसे करते हैं ? वहीं सफेद पोशाक पहननेवाले बहुतसे हिन्दू हैं । में खासा पैसा कमाते हैं और खुशहाली में रहते हैं। वे क्यों न भेक दिनके लिये हरिजन बस्ती में जाकर रहें ! वे अगर वहाँ जायें, तो तुन्हें क्य हो जायगी और सुननेंस को भी तो गाय मर भी जायेंगे । भैसी जगह जिन्सानोंको रखना, क्योंकि सुनका यह गुनाह है कि वे हरिजनोंके घर पैदा हुने, बहुत बुरी बात है । यहाँ दिल्ली में भी मे हरिजनोंकी वस्तीमें गया हूँ। वह भी बहुत खराब है । मगर अजमेर सुखसे भी बदतर है। यह वही करमकी बात है । क्या जैसी शरमनाक बातें हम करते ही रहेंगे ! हमने आजादी तो भाभी, लेकिन सुख भाखाकी तब तक कोभी कीमत नहीं, जब तक हम जिस तरही चीजे बन्द नहीं कर सकते। यह भेक दिनमें बन्द हो सकता है । क्या हम हरिजनों को सूखी जगह में नहीं रख सकते ? वे मैला झुठानेका काम तो करें, लेकिन वे मैलेमें ही पड़े रहें, भैसा तो नहीं हो सकता । हमारी तो आज अकल मारी यभी है । हमारे पास हृदय नहीं रहा और हम औश्वरको भूल गये हैं । भिसीलिये तो गुनाहके और पीछे हम ओक-दूसरेका मैब निकालें, दूसरोंको दोष दें और खुद निर्दोष बनें, यह बड़ी खतरनाक बात है । काम करते जाते हैं। ३९९
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