सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/४२०

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

होनेवाला है ? मैंने सोचा कि दुनिया के नामसे और भीश्वरकै नामसे वहाँ जो हमलावर हैं, सुनते और सुनके पीछे पाकिस्तान से भी यह कहूँ कि आप बिना किसीके मोगे अपने आप शोहरतके साथ सुन नको वापस लौटा दें। जैसा करना आपका धर्म है। मै अिस्लामको काफी जानता हूँ और मैंने खुस बारेमे काफी पड़ा भी है । भिस्लाम यह कभी नहीं दिखाता कि औरतोंको खुदा ले जाओ और सुन्हें जिस तरह ' रखो । वह धर्म नहीं, अधर्म है। वह शैतानकी पूजा है, भीश्वरकी नहीं । 1 १३८ बहावलपुरके दोस्तोंसे २८-१८४८ प्रार्थनाके बाद अपना भाषण शुरू करते हुये गाधीजीने जिक किया कि बहावलपुरके कुछ भाजियोंकी शिकायत थी कि न्होंने मिलनेका गाधीजीने नके किने समय निकालने का वचन दिया, और विश्वास दिलाया कि सुनके लिये जो भी किया जा सकता है, किया जा रहा है। इन्होंने कहा कि डॉ० सुशीला नय्यर और लेसली क्रॉस साहव महाबलपुर चले गये हैं और नबावने सुनकी पूरी सहायता करनेके लिये कहा है । समय माँगा था, पर झुन्हें समय नहीं दिया गया । राजधानीमें शान्ति भगवानको कृपासे यूनियनकी राजधानी दिल्लीमें तीनों जातियों में फिरसे शान्ति कायम हो गयी है। मिसले सारे हिन्दुस्तान में हाळत जरूर सुधरेगी ! दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह -- -बाप जानते दक्षिण अफ्रीकाका जिक्र करते हुये सुन्होंने कहा- हैं कि दक्षिण अमोका हमारे लोग अपने हकोंके लिये लढ रहे हैं । यहाँ जिस तरह को भी किसीके एक नहीं छीनता कि लोग कहीं जमीन २६ જૂ ४०१