१३९ २९-१-१४८ बनेकी मीनें तो काफी हैं। आसके लिये ६ चुनी हैं । १५ मिनटमें जितना कह सकूँगा, कहूँगा । देखता हूँ कि मुझे यहाँ ada aisi देर हो भी है । वह होनी नहीं चाहिये थी । बहावलपुरके टिने डेपुटेशन सुशीला बहन बहावलपुर भी है । बहकिदुबी लोगोंको देखने गभी है। दूसरा कोभी अधिकार तो है नहीं, न हो सकता था । फ्रेण्डस् सर्विस लेसली क्रॉस साहबके साथ वह भी है। मैने फ्रेण्डस् यूनिटमेरी किसीको मेजनेका सोचा था, ताकि वह वहाँ लोगोंको देले, मिले और मुझे सब हालात बसावे । म समय सुशीला बहन जानेकी यात नहीं भी । लेकिन जय ने सुना कि वहाँपर सैकडों आदमी बीमार पड़े हैं, तो सुखने मुझे पूछा कि मैं भी जालू क्या मुझे ह ? बहुत अच्छा लगा । वह मोआनाली में काम करती थी, 'रुसे फ्रेण्डस् चूनिट मनका सम्पर्क था । वह आखिर कुशल डॉक्टर है और जायके गुजरात जिलाकी है। सने भी फाया है। क्योंकि सुसकी तो वहाँ काफी वायदाद है। फिर भी खुसके दिलमें कभी जहर पैदा नहीं हुआ। वह भी है, क्योंकि वह पायी जानती है, हिन्दुस्तानी जानती है । र्दू और अग्रेजी भी जानती हैं। वह कॉस साहयको मदद दे सकेगी। वहाँ जाने बदरा है । लेकिन सुसने कहा, भुझसे क्या खतरा है ? असे उरती, तो नोभासाठी क्यों जाती हैं पजाय बहुत लोग मर गये हैं, बिलकुल मांटयामेट हो गये हैं। लेकिन मेरा तो भैंसा नहीं । खानपीना मिलता है, सबकुछ मीश्वर करता है सो आप मैनेंगे और कॉस साहब के जायेंगे, तो मैं कहाँके लोगोंको देख लूंगी। मैंने क्रॉस साहब से पूछा, सुशीलाको आपके साथ भेजूँ क्या? दे खुश हो गये। कहने लगे, यह तो बहुत ही अच्छी बात है। मै 1 2 ४० ६ 1
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