। न्होने कहा 1 1 कहा कि जो कुछ कहना हो कृष्णजीसे कह दें। लेकिन मिना समझ कि मे सुन्दै भूला नहीं हूँ । वे सब आदमी थे। शुनका गुस्सेसे भरा होना स्वाभाविक था, मगर वे मेरी बात मान गये । येक भाजी थे । वे सरणार्थी थे या कौन थे मैने पूछा नहीं। - " तुमने बहुत खराबी कर दी है। क्या और करते ही जाओगे ? जिससे बेहतर है कि जाओ। बड़े महात्मा हो, से क्या हुआ ? हमारा काम वो दिगाकते ही हो। तुम हमें छोर हो । हमें भूल जाओ । भायो ।" मैने पूछा, कहाँ जानू ! पीछे सुहाने कहा, हिमालय जो वो मैने डौटा दे मेरे जितने दुर्ग नहीं। वैसे तो युजुर्ग है, तारे हैं, मेरे जैसे पाँच सात आदमियो सक्ते हूँ मे तो महात्मा रहा। कमजोर शरीर | aai जायूँ तो मेरा क्या हाल होगा? तो मैने हँसकर कहा, क्या आपके पहने से जामू ? किसकी बात सुन को भी कहता है यहीं रहो, दोभी कहता है जागो । कोभी डांटता है, गाली देता है, को भी तारीफ करता है । तो मे क्या कहे आश्वर जो हुक्म करता है, यही मे करता हूँ । आपकते हैं, आप भीश्वरको नहीं जानते । तो कमसे कम जिवना सक्वे तो कि से अपने दिलके अनुसार करने दें । आप नह है कि सर तो इन है । तब परमेश्वर कaara fवर हो 1 I यह ठीक है कि पच परमेश्वर है। मगर यह का सवाल नहीं ! दुखीस बेती परमेश्वर है, लेकिन दुखी खुद परलामा नही अटावारता हूँ कि हर अंक की मेरी सगी बहन है, मेरा दुख है। आप क्यों मानते हैं मेरा नहीं जानता, आपके नमें हिस्सा नहीं लेता, हिन्दुओं और farita के हनन है, और मुसलमानोंका दोस्त हूँ fre बोभी कि ड दया। मी गाली देrt faखते हैं, aster जरा जायें हम दो । मन भागो में किसी यदनंसे Free ना किसी के कामे ४०८ बना है।
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