की जाय या असे नामंजूर कर दिया जाय। मेरे लिये कुरानकी आयत वदना प्रार्थनाका अमा हिस्सा है, जिसे छोदा नहीं जा सकता । गुस्सेकी दवाभिये आजके अहम सवालपर लौटते हुये गाधीजीने कहा, मै आपके गुरुमे और भुमसे पैदा होनेवाले मुत्तावलेपनको समझ सकता हूँ । लेकिन अगर आप अपनी आजादीके लायक बनना चाहते हैं, तो आपको अपना गुन्ना दबाना होगा और न्याय पानेकी भरसक कोशिश करनेके लिये अपनी सरकारपर विश्वास रखना होगा। मैं आपके सामने अपना अहिंसाका तरीका नहीं रख रहा हूँ, हालांकि मै झुसे रखना बहुत पसन्द करूँगा । लेकिन में जानता हूँ कि आज मेरी अहिंसा की बात कोभी नहीं सुनेगा । मिसाल मैंने आपको वह रास्ता अपनानेकी यात सुताभी है, जिसे सारे लोकशाही हुकूमतवाले देश अपनाते हैं । लोकशाहीम हर आदमीको समाजी अिच्छा यानी राजकी अिच्छाके मुताबिक चलना होता है और सीके मुताबिक अपनी अच्छाओकी हद बाँधनी होती है। स्टेट लोकशाही के द्वारा और लोकशाही के लिये राज चलाती है। अगर हर आदमी कानून अपने हाथमे ले ले, तो स्टेट नहीं रह जायगी; वह अराजकता हो जायगी, यानी मनाजी नियम या स्टेटकी हस्ती मिट जायगी । यह आजादीको मिटा देनेका रास्ता है । जिसलिये आपको अपने गुस्सेपर काबू पाना चाहिये और राजको न्याय पानेका मौका देना चाहिये । मेरी रायमें अगर आप नरकारको अपना काम करने देंगे, तो जिसमे कोअ शक नहीं कि हर हिन्दू और सिक्ख भरणार्थी ज्ञान और भिजतके साथ अपने घर लौट जायगा । मै यह कबूल करता हूँ कि आप लोगोंको पाकिस्तानमें बहुत कुछ सहना पडा है, कभी घर सुजर गये और 'चरवाद हो गये है, सैकड़ों-हजारों जानें गभी है, लडकिया भगाओ ग है, जबरन लोगोंका धर्म बदला गया है। लेकिन अगर आप अपनेपर काबू रखें और अपनी बुद्धिपर गुस्सेको हावी न होने दें, तो लडकियाँ लौटा दी जायेगी जबरदस्तीके धर्मपल्टेको झूठ करार दिया जायगा, और आपकी जमीन-जायदाद भी आपको लौटा दी जायगी। लेकिन अगर १९
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