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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/५२

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है । अगर कानून और व्यवस्थाके रक्षक ही तरफदार बन जायें और अपराध करने लगे, तो कानून और व्यवस्था कैसे कायम रखी जा सकती है ? मे फौज और पुलिसवालोंसे अपील करता हूँ कि वे तरफदारी और अमानीसे बचे रहें । जाति या धर्मका फर्क किये बिना अन्हें लोगोंके वफादार सेवक बने रहना है । 1 चातको बढ़ा चढ़ाकर मत कहो ११-१-१७ पाँच बजे शामको गाधीजी अपने ठहरनेकी जगहसे निकले और इन्होंने कूचा वाराचन्द नामक अक छोटेसे हिन्दू लत्तेका सुभामिना किया । येक हिन्दू प्रतिनिधिने हिन्दुओंकी भेक बडी सभामे बोलते हुये कहा कि यह कत्ता चारों तरफसे मुसलमानोंसे घिरा हुआ है । सुन्होंने हिन्दुओंकी तकलीफोंका बहुत बडाचढ़ाकर क्यान किया और यह कहते हुये अपना मापण खत्म किया कि जिस लत्तेके सारे मुसलमान ज्यादातर लोगी हैं और अन्होंने हिन्दुओंके खिलाफ भयंकर आन्दोलन चला रखा है । भिसलिओ जिस जगह से सारे मुसलमान हटा दिये जायें । सुनका मत यह था कि पाकिस्तानके मुसलमान वहाँ जैसा बरताव कर रहे हैं, ठीक वैसा ही बरताव हमें यहाँ करना चाहिये । बहादुर और मिटर बनो जिसका जवाब देते हुये गाधीजीने कहा कि मैं जिस बातसे सहमत नहीं हो सकता कि जिस तरह पाकिस्तान के मुसलमान वहाँके सारे गैरमुसलमानोंको अपने यहांसे खदेड रहे हैं, खुसी तरह हिन्दु- स्तानको अपने यहाँकी सारी मुस्लिम जनताको पाकिस्तान भेज देना चाहिये । दो गलत काम मिलकर ओक सही काम नहीं बना सकते | भिसलिये आप लोगोंसे मेरी प्रार्थना है कि आप मेरी सलाहपर गौर करें और अपने दिलोंमें किसी किस्मका डर रखे बिना यहदुरीसे काम करें २३