सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/५४

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

५ भगवान डर भगाता हैं १०-९-४७ चूंकि किसीने कुरान शरीफकी भावते पहनेपर भेतराज नही किया, सिलिये आजकी प्रार्थना हमेगाकी तरह जारी रही । अपने भाषण में गाधीजीने आज गायी गयी प्रार्थनाका चिक करते हुये कहा मम कविने कहा है कि जो लोग भगवानपर भरोमा करते हैं, सुनके दिलोंसे यह सारा डर दूर कर देता है । भाज हिन्दू और मिक्स दिल्लीके मुसलमानोंको डरा रहे हैं। जो लोग खुद उरसे छूटना चाहते हैं, गुन्हें दूसरोंके दिलोंमें डर पैदा नहीं करना चाहिये। बन्नू सीमान्तका अरु शहर है, जहाँ से मेक मुसलमान दोस्तके घरमें रह चुका हूँ। बन्नूसे कुछ लोग मेरे पास आये और शिकायत की कि अगर गैरमुस्लिमो को बहाँसे जल्दी ही हटाया न गया, तो वे सब मार डाले जायेंगे और बरबाद हो जायेंगे। वे सुनलमान दोस्त, जिनके घर में ठहरा था, पहले की ही तरह अपने विमानोंके पक्के हैं। मगर वे अकेले ही जैसे है, जिसलिये वे चाहे जितनी कोशिश करें, वहाँ के गैरमुस्लिमोंको बचा नहीं सकते। दूसरे मुसलमान, जिनमें सरहदके मुसलमान भी शामिल हैं, रोजाना आकर असी हरकतें करते हैं, जिनसे गैरमुस्लिमोंके दिलोम डर पैदा हो। मिलिये समय रहते गैर-मुस्लिमोंको बहाँसे हटा लिया बाना चाहिये । मैन सुनसे कहा कि मेरे हाथमें तो अधिकार नहीं है, मगर मै आपका किस्सा पण्डितजी और सरदार पटेलको सुना दूँगा । न दोस्तोंने विनती की कि झुनकी मदद के लिये हिन्दू फौज मेजी जाय। जिसपर मैने खुनसे वही बात कही जो मे पहले कभी यार कह चुका हूँ कि आपको भगवानके मित्रा और कोभी नही बचा सकता। कोभी भी जिन्सान २५