दूसरेको बचा नहीं चना । मन्तेोनी भी नहीं कह सकता कि या मे निट भी वह विन्दा रहेगा नहीं । येक भगन ही कैसा है, जो पहले था, अब भी है और माने भी हमेशा रहेगा । निताने पत्र कर्म है कि आप सुवच्छे पुकारें और झुती भा रखें। जो नी हो. मी बादली कभी किसी भी हाथों वृतबीच बहला बुरानी न है। अल्पसंख्यकोंकी हिफाज़त आगे चलकर गाधीजी का कि पाकिस्तान हिन्दु और स्क्विोंका किस तरह डरना बही सारके लिये बहुत बडे कलंक की बात है और खुद कायदे व द्वारा दिलाये गये अप विशाल विश्वासरे विधा है। हिन्दुस्तान की एक मी ही तरह पाकिस्तानको बहुस्य जाति यह है कि पह अपने यहाँ सुन अपने हिमायत में जिनकी जि. डिन्दगी और आपदा के हायने है । भाभी दुश्मन बन गये ! व्हयात ने सनने नहीं आती के से लोग भाभीमानीकी तरह रहे है, वलियांवाला के हत्याest विशखून प बहा है, आज वे फेक दूसरे के दुमन कैसे हो गये ! ज्व दिन्द्रा हूँ, न त तो यही कहूंगा कि जैसा नहीं होना चाहिये । जिससे मेरे दिल्ल जो कुछ बना रहता है, सुलने में हर दिन, हर पल भगवान शान्तिको प्रार्थना करता रहता है। अगर चान्दि नहीं हुकी, से ने भगवानले यही वह से ठसे । शरणार्थी आन खात होते देखकर नुझे दिल्लीके और पूर्व और पचन पंजान शरणार्थियोंका सवाल बाना है । ये वेदर, बेमातरा हो किनके पापोश छ भोग रहे हैं ? है कि हिन्दु और क्विक ५७ नोव दन क्याविना पूर्व पंगा रहा है । जिन चालते चैव तिर धूनने बनता है कि यह देते हो
पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/५५
दिखावट