विना लाभिसेन्सके हथियार अब मे बिना लाभितेन्स के छिपे हुमे हथियारोंके होनेपर आता हूँ। जिसमे कोभी शक नहीं कि दिल्लीम जैसे कुछ हथियार मिले हैं। थोड़े बहुत हथियार लोग अपने आप मेरे पास भी पहुँचाते रहे हैं। छिपे हुने हथियारोंको हर तरकीबसे बाहर निशलना ही होगा। जहाँ तक में जानता है दिल्लीमें अभी तक जोर-जबरदस्तीसे जो हथियार निकाले गये हैं, झुनकी तादाद बहुत ज्यादा नहीं है। ब्रिटिश हुकूमत के दिनों भी लोगोंके पास छिपे हथियार रहते थे। तब किसीने की परवाह नहीं की । जब आपको किसी जगह छिपे बारुदखानों का यकीन शे जाय, तो सुन्हे हर तरकीबसे खुब्न वीजिये । आजिन्दा फिरसे जिस तरह बातका बतगह बनाने का मौका न आने पावे, जिसका ध्यान रजिये । हम अंग्रेजोंपर अक कानून लागू करें और अपने आपके लिये दूसरा कानून बनायें – जब कि हम सियासी तौरपर आजाद होनेका दावा करते हैं - यह ठीक नहीं । अगर आपको किसीको मारना है, तो के बारेमें इलको धात न कहें । सब कुछ कहने और करनेके बाद ६० सालकी जीतो मेहनत से जीती हुआ आजादीके लायक धननेके लिये हम यहीसे बड़ी कठिनाभियाँका भी बहादुरीसे सामना करें । कठिनायिका अच्छी तरह मुकाबला करनेसे हम ज्यादा योग्य और ज्यादा मूंचे भुलेंगे । - बहुमतका फ़र्ज़ 5. बहुमतवाले लोग अगर अल्पमतवालोंको जिस उरसे मार डालें या यूनियनसे निकाल दें कि वे सब दगाबाज साबित होंगे, तो यह बहुमतवालोंकी बुलदिली होगी। अल्पमतके हकोंका सावधानीसे खयाल रखना ही बहुमतवालोंको शोभा देता है । जो बहुमतवाले अल्पमतके कोंकी परवाह नहीं करते, चे हॅसीके पात्र बनते हैं । पक्का आत्म- विश्वास और अपने नामधारी या सच्चे विरोधी में मदुरीभरा विश्वास ही बहुमतवालोंका सच्चा बचान है। जिसलिये मैं सच्चे दिलसे यह बिनती करता हूँ कि दिल्लीके सारे हिन्दू, सिक्ख और मुसलमान दोस्त ૩
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