बनकर गले मिले और वाकीके हिन्दुस्तान के सामने, क्या मैं कि सारी दुनियाके मामने, अक ची और शानदार मिमाल पेन करें 1 हिन्दुस्तानके दूसरे हिस्वाने क्या किया है या वे क्या रहे हैं, यह दिल्लीको भूल जाना चाहिये। तभी वह व्यक्तिगत घेरेको तोड़नेका गौरवमरा दाता पर मस्ती है। अगर कभी जी हो, तो सजा देने और मत है, न कि शहरियोंका : शहरियोंको कानून कभी अपने हाथमें नहीं देना चाहिये । १२ खुला भिकार प्रार्थना के बाद गायीजीने शुम नाvir जिक २३-९-११० किया, जो क न्होंने श्री० ० मतु गाधी और आभा गाधीने समाने पर भी थी। कहा, मितवार शामको प्रार्थनामे जय से दोनों भजन गा रही थी, तो वे लय चूक गभी और अपनी हँसी नहीं रोक सकीं । तिखे मुझे पास हुआ। मिससे जाहिर होता है कि लक्याने प्रार्थनाके महत्त्वको नहीं समझा । बादमे सुन्होंने मुझमे अपनी गलती लिये माफी मांगी। माफी मांगनेA etat area नहीं थी, क्योंकि से सुनसे नाराज नहीं था । लदे मे अपने आपपर नाराज हुआ, क्योंकि दोनों लडकियोंकी शिक्षा मेरी देखरेखमे हुआ थी. फिर मी में सुनके दिलमे यह बात नहीं बैठा मक्ा कि प्रार्थना करते मनय सुन्हें अपने आपको भगवानने लोन पर देना चाहिये । लड़कियोंके पछतानेपर मुझे थोड़ी शान्ति मिली। लेकिन मैंने सुन्हें सलाह दी कि वे आम सभा में अपनी गलती कबूल करें। सुन्होंने खुशी मेरी बात मान की। मेरा यह विश्वास है कि श्रीमानदारीले जुले आम अपनी गलती कचूल करनेले गलती करनेवाला पवित्र बनता है और दुबारा गलती करलेखे बचता है । ३४
पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/६३
दिखावट