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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/६९

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लुत्तमें अक तरफ जबरदस्त राजा रारण या और दूसरी तरफ देशनिकाला पाये हुमे राम थे। मगर रामची जीत मिलीनिओ हुजी कि वे अपने धर्मशश कमअसे पालन कर रहे थे। अगर दोनों ही पार्टियाँ अधर्म करने लगती, तो कौन किसकी तरफ गली भुला गक्नी भी यह मंगल सुनके धरतावको सुचित नहीं ठहरा मक्ता था कि किसने ज्यादा बुरा की, या किसने चुराभीकी शुरुआत की दगाबाजीको सजा आप लोग बहादुर हूँ। आफ्ने जनम्ठस्न विवश eeraan मुकाबला किया है । क्या आज आप कमजोर हो गये हैं? बहादुर लोग भगवानके सिवा और किसीसे नहीं उरते । अगर सुनलमान दगाबाजी करते है, तो सुनकी दगाबाजी अन्हें बरनाद कर देगी। किसी भी स्टेटने यह नरसे बड़ा गुनाह माना जाता है। कोभी भी स्टेट दगानाजको कासरा नहीं दे सकती। मगर ash at लोगोको निशल घेना ठीक नहीं है । 1 पुलिस और फोनका फर्ज मैंने सुना है कि पुलिस और फौज हिन्दुस्तानी मंघम हिन्दुओंकी और पाकिस्तानम सलमानोंकी तरफदारी करती है। यह सुनकर मुझे बहुत दुख होता है । जन पुलिम और फौज विदेशी सरकारके मातहत थी, तब यह अच्छी तरह सोच भी नहीं सकती थी कि यह देशकी क्या सेवा कर सकती है। लेकिन आज वह अपने अमेज अफसरों सहित देशी सेवक है। भाज ससे आशा की जाती है कि वह श्रीमानदारीसे और गैर-तरफदारीसे काम करे 1 जनवासे मेरी अपील है कि वह पुलिस और फौजसे न डरे । भाखिर आपके लम्बे चौड़े देशकी करोबोकी आवादीकी तुलना में लोग बहुत थोडे हैं 1 नगर देशकी जनताका वरसाव सही रहे, तो पुलिय और फौजके किये भी सही बरताव करनेके सिवा और कोभी रास्ता न रह जाय । ५०