१६ राम ही सबसे बडा वैद्य है २७-९-४७ अपना भाषण शुरू करते हुमे गाधीजीने खुस अखवारी खवरका जिक्र किया, जिसमे शुनकी चीमारीका हाल छपा था । गाधीजीने कहा कि यह खबर मेरी जानकारीके कौर हरी है और जिससे मुझे दुख हुआ है। बीमारी सी नहीं थी जिससे मेरे काम में बाधा पडती । जिसके सिवा में पहलेसे अच्छा महसूस कर रहा हूँ । जिस बीमारीको मितना महत्त्व नहीं देना चाहिये था। शुरू खवरमें डॉ० दीनगा मेहताको मेरा निजी चैय कहा गया हैं, यह गलत है । डॉ० मेहताने मुझसे कहा है कि जिस तरहके घयानके लिये वे जिम्मेदार नहीं है । वे मेरे बुलानेपर मेरे पास आये थे, मगर वैद्यकी तरह नहीं । वे अपनी आध्यात्मिक कठिनाभियाँ हल करानेके लिये आये थे। डॉ० मेहता मेक कुदरती जिलाम करनेवाले हैं। वे मेरे दोस्त हैं, जिन्होंने मुझे अक्सर मदद दी हैं ।' मगर डॉक्टरकी हैसियतसे झुनकी मददकी मुझे जतरत नहीं पडी । • खुशीला नय्यर, डॉ० जीवराज मेहता, डॉ० बी० सी० रॉय और स्वर्गीय डॉक्टर अन्सारी मेरे नीजी डॉक्टर रहे हैं। मगर झुनमेसे किसीने मुझे पहलेसे यताये बगैर मेरी तन्दुरुस्तीके यारेमें कोभी चीन अनवारमें नहीं थी । आज मेरा भेकमात्र वैद्य मेरा राम है। जैसा कि प्रार्थनामें गाये गये भवनमे कहा गया है. राम सारी शारीरिक, मानविक और नैतिक युरामियोंको दूर करनेवाला है । कुदरती मिलाजके डॉक्टर दीनशा मेहतासे चर्चा करते हुये वह सत्य पूरी तौरपर मेरे सामने स्पष्ट हो गया । मेरी राय में कुदरती मिळानमें रामनामका स्थान पहला है । जिसके दिलमे रामनाम है, झुसे और किसी दवामीकी भरत नहीं है । रामके सुपासकको मिट्टी और पानीके जिलाजकी भी 1
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