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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/७८

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१७ मि० चचिलका अविवेक २८-९-१४७ आज शामकी सभाएँ हमेशाके बनिस्वत ज्यादा लोग जमा हुये थे । गाधीजीने पूछा, समामे कोनी असा आदमी है जिसे कुरानकी खास आयतें पहनेपर अतराज हो । सभाके दो आदमियोंने विरोधमें अपने हाय कुठाये । गाधीजीने कहा, मैं आपके विरोधकी कदर करूँगा, जो मी मे जानता हूँ कि प्रार्थना न करनेसे बाकीके लोगोंको बढी निरागा होगी । अहिंसाएँ पका विश्वास रखनेके कारण जिसके सिवा दूसरा कुछ में कर नहीं सकता, फिर भी यह कहे बिना नहीं रह सकता कि आपको अपना विरोध करनेवाले जितने वढे बहुमतकी अिच्छाओंका अनादर नहीं करना चाहिये । आपका यह बरताव हर तरहसे अनुचित है। मैं जाये जो बात कहूँगा, झुससे आपको यह समय लेना चाहिये कि किसीके बहकावे में आकर आपने जो गैरवादारी दिखाओ है, वह झुस चिड़ और गुस्सेकी निशानी है जो आज सारे देशमे दिखrit देता है, और जिसने मि विन्स्टन चर्चिलसे हिन्दुस्तानके बारेमें बहुत की बातें कहलवामी हैं । आज सुबहके अखबारोंमें स्टर द्वारा तारखे भेजा हुआ मि० चर्चिलके भाषणका जो सार छपा है मुसे मैं हिन्दुस्तानीमें आपको समझाता हूँ। वह सार किस तरह है " आज रातको यहाँ अपने अक भाषण में मि० चर्चिलने कहा- 'हिन्दुस्तानमें जो भयंकर खैरेजी चल रही है, झुससे मुझे कोमी अचरज नहीं होता ।" &s अन्होंने कहा- 'अभी तो मिन बेरहम हत्याओं और भयंकर जुल्मोंकी शुरुआत ही है । यह राक्षसी खैरेजी वे जातियाँ कर रही हैं, ये जुल्म मेकदूसरी पर वे जातियाँ ढा रही हैं, जिनमें सूचीसे सूची संस्कृति और सभ्यताको जन्म देनेकी शाक्त है और जो ४९