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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/८२

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अक व्यक्तिकी ताकत जहाँ तक मेरा सम्बन्ध है, आप लोगोंको नाराज करके भी मे जिस बात को दोहराना चाहूँगा कि हमारे धर्मकी रक्षा करना हमारे ही हाथन है । हर बच्चेको यह तालीम मिलनी चाहिये कि वह अपने 1 धर्मके लिये अपनी जान दे सके । प्रहादकी कहानी आप सब जानते ही 1 बारह साली अमर वह अपने विश्वासके लिये अपने यापके भी खिलाफ हो गया था। हर धर्म में असी बहादुरीके ख़ुदाहरण मिलते हैं । मैंने अपने बच्चों को यही तालीम की है । मैं अपने बच्चोंके धर्मका रक्षक नहीं हूँ। भोरतोंको अपला कहना भूल है । जो औरत अपने विश्वासको समवृत्तीसे पकड़े हुये है, मुझे अपनी भिजत या अपनी श्रद्धापर हमला होनेका डर रखनेकी जररत नहीं है । सरकारको आपकी हिफाजत करनी चाहिये | मगर मान लीजिये कि वह जिसमें कामयाब नही होती, तो क्या आप अपने धर्मको लुसी तरह बदल देंगे जिस तरह आप अपने कपडे बदल डालते ₹ हिन्दुस्तानी मुसलमान मुसलमानांपर होनेवाले हमलोंका जिक्र करते हुये गाधीजीने पूछा कि हिन्दुस्तान के मुसलमान कौन है ? ये सबके सब भितनी बड़ी तादाद में अरबसे नहीं आये । बोडेसे मुसलमान बादरसे आगे थे। मगर ये करोड़ों, हिन्दूसे मुसलमान बने हैं। जो लोग खुद सोचसमझकर अपना धर्म घदलते हैं, झुनकी मुझे परवाह नहीं है। मगर जो अछूत या शुद्ध मुसलमान बने हैं वे सोचसमझकर नहीं बने है । आपने हिन्दू धर्म छुआछूतको जगह डेकर और मिन नामधारी अछूतोंको दबाकर मुसलमान चन जानेके लिये लाचार पर दिया है । सुन भाभियों और बहनोंको मारना या सुन्हें दवाना आपको शोमा नहीं देता । Tota