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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/९२

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1 या । पैर और बदकी भावनाने देशमें पुरानीका जहरीला घेरा शुरू कर दिया है और लाशों लोगोंको मुतवतमें डाल दिया है । आज हिन्दू और मुसलमान बेरनी अरु दूसरेकी होट करते दिसाओ दे रहे है। वे औरतों बच्चों और बूटोंका पुन करते भी नहीं भरमाते । मैन हिन्दुस्तानकी आजादी के लिये स्टडी मेहनत की है और भगवानसे प्रार्थना की है कि यह मुझे १२५ परस जिन्दा रहने दे, ताकि में हिन्दुस्तानने रामराज कायन होते देख चहूँ । लेकिन भाग असी को भी आमा दिवाभी नहीं देती । लोगाने कानून अपने हाथोंमें ले लिया है। क्या मै लाचार बनकर जित अन्धेरको देखता रहूँ । 1 भगन में प्रार्थना धरता है कि या तो वह मुझे भैसा चल दे कि मेरे वतने लोग अपनी गलनीकी समझ जायें और झुसे सुधार लें, या फिर मुझे जिम दुनियासे ही झुठा है। अक वक्त था, जब आप लोग अपने प्यारके कारण मेरी बातोंको आँख नृटकर मानते थे, आपका प्यार तो शायद वैसा ही है, मगर जान पड़ता है कि मेरी अपील आपके दिमाग और froiपर असर डालने की अपनी ताकत खो चुकी 1 | क्या जब तक आप गुलान थे, तभी तक में आपके कामका था और आजाद हिन्दुस्तान में क्या मेरा को भी सुपयोग नहीं रहा क्या आजाका मतलब सभ्यता और भिन्सानियतसे बिदा देना है ! जो भात में पिछले white चित्रचिहार आपसे कहता रहा हैं, खुसके सिवा अष दूसरा कोमी सन्देश में आपको नहीं दे सकता 1 आज में आपका ध्यान आगे आनेवाली ads मौसमकी तरफ सींचना चाहता हूँ। दिल्ली और पंजाबमे बहुत सी पडती है। जो ! लोग गरम अम्ल या राय दे सकते हैं gr बसे में अपील E करता हूँ कि वे ये चीजें भी मेजी आ सकती हैं। गरणावियोंके लिये दें। मोटे सूतकी चहरें मेजनेसे पहले अगर जरूरी हो, तो आप सुन्हें वो डालें और सी हैं। मिस जिन्सानियत के काम में हिन्दू-मुसलमान सब | हिस्सा लें । मैं चाहता हूँ कि आप कोभी चीज किसी खास आतिका नाम लेकर न दें। आप जितना विश्वास रखें कि आपकी भेंट सिर्फ ६५