पृष्ठ:Garcin de Tassy - Chrestomathie hindi.djvu/१०५

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॥६॥ विप्रन कलि मे माने कोई। धर्म कथा कलि माहिं न होई ॥ हरि की पूजा अक्षत कई। सौंधा पुष्प गनिका के धरई॥ कलि मे टों नाटन मन जाने। बेद पुरान न कोउ माने॥ घात बाद बलु कलि मे होई। नर्क पाप तें उरे न कोई॥ जलं स्वास्थ तळं देहिं बुलाई। निसप्रेही माने नहि गई। स्वारथ जान ता को कछु देई । देषि अनाथ तालि लसि लेई ॥ . कलि मे विप्रन नाहिं संतोषा। ले हि पती ग्रह लोहिं न मोषा॥ लोम जम्य कछु दान न काली। गंधर्व लोय कलि मे श्रोतस्ली ॥ तिस कों और धूत सो माने। सती साध कलि मे न पिछाने॥ जिलि तें र तपरत लोय मोषा। तालि यकादसि लावे योषा॥ कलि मै सूद्र न्हायकरि पाई। ब्राह्मान सीतल जल हिं उराई॥ करें विप्र कृषी व्योपाए। यो कलि मे जु चले संसारा॥