पृष्ठ:Garcin de Tassy - Chrestomathie hindi.djvu/१४९

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॥१३॥ बेसम्पायन उवाच। . शकुन्तला कहि भूप सों यों चली जब दुख छाय। गगन बाणी भई तब दुधन्त प्रति सुखदाय ॥ ऋत्विक पुरोहित सहित मंत्री सुनी भूपति तोंन। गर्भ की पात्र माता पिता है सुत जोंन ॥ पुत्र पालु शकुन्तला को करलु अादर भूप। रेतभव सुत यमपुरी तें देत गति शुचि रूप ॥ सत्य कहति शकुन्तला नृप गर्भ तो अभिराम। अंग दुसरो पिता को सुत जनति जाया श्राम ॥ चारु तातें पुत्र को सु शकुन्तलाभव भूप। छोडि जीवत सुत हि जियवो सो अभाम्य अनूप ॥ शकुन्तला दुधन्त सम्भव पुत्र यह बलबान। . भरलु भूपति मानि तात दिव्य बचम प्रमान ॥ भरत तातें नाम राखलु पुत्र को अभिराम। भरण तुम सों कहो यातें अहो भूप ललाम ॥ गगन बाणी सुनत यह नृप भरो मोट ललाम। बोलि मंत्री सौ सु सें कन्यो अप्ति अभिराम ॥ जयकरीछन्द। देव टूत के सुने सु बेन। कहे गगन गत आनद ऐन ॥ श्रात्मज सत्य लियो म जानि। कियो न ग्रहन लोक भवमानि॥ अब यह सुद्ध बिचारहि सर्व। नतरु कस्त शा जन स्वर्ब ॥