पृष्ठ:Garcin de Tassy - Chrestomathie hindi.djvu/२७

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बीबर चरित्र। शूद्रक नाम एक राजा वा की क्रीडा को एक सरोवः । नाम राजहंस हो । वा की बेटी को नाम कर्पूरमंज ' होय में व्हां त्यो। तहां बोखर नाम एक राजपूत ः | के लिये प्राय राजद्वार पे ठाडो भयो अरु उनि पोस्थित राजा तें मिलानो हों सेवा करनि के हेतु आयो हो बात जाय राजा सों कही। तब राजा में वाहि बुल ! दिन प्रति कहा लेउगे। उनि कही चार सो तोल राजा बोल्यो ओर तिहारे साथ को है। उनि कही देह राजा कहीं इतेक हम तें न दियो जायगी। यह सु: करि चल्यो। तद मंत्री ने राजा सों कही महाराज च । सुबरन दे राखिये श्री या को पराक्रम देखिये इतेक जं. मंत्री की बात मानि राजा में वाहि सोनों दे राख्य कंचन ले वा में अापने घर जाय अाधो तो बालान करि दियो अरु वा को अाधी भूखे भिखारी भिभुकन श्रो एक भाग निज भोजनार्थ राख्यो। याही भांति वर! सहित व्हां रहनि लाग्यौ। जब सांझ होय तब खां सेवा में जाय उपस्थित होय। एक दिन कृष्ण चतुर्दशी की घन घुमति मेह पयो। ता समें काढू नारी के सुनि राजा बोल्यो कोउ है। बीबर कही महाराज का है। राजा कही देख तौ को रोवत् है। राजा की प्रार