पृष्ठ:Garcin de Tassy - Chrestomathie hindi.djvu/६०

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॥88॥ अंतरीक्ष भये देखें सर्व॥ चले बिमान घिरे सिर नावें। देव बधू सब मंगल गावें॥ हाथ गल्यो प्रभु भांवर पारी। बाम अंग रुक्मिनि बैठारी॥ : छोरी गांठ पटा फेर दियो। कुलदेवी को तब पूजियो॥ छोस्त कंकन हरि सुंदरी। खेलत टूधाभाती करी॥ अति अानंद रच्यो जगदीस। निरषि सषि सब में लिं असीस ॥ हरि रुक्मिनि जोरी चिरजियो। जिन को चरित सुधा रस पियो॥ दोनो दान बिप्र जे पाए। मागध बंदी जन पहिलाए॥ जे नृप देस देस के पाए। दीनी बिदा सबै पहुंचाए॥