पृष्ठ:Garcin de Tassy - Chrestomathie hindi.djvu/९१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


________________

॥ ५॥ साह अल्ली पठायो लेन ता को सो सुनायो सूवे बिप्र ज्यायो जानिये। देषि वे को चहे नीके सुष सौ निबाले अाय कही बळु बिने कही चली मन बानिये । पहुंचे नृपति पास अादर प्रकास कियो दियो उच्च प्रासन ले बोल्यो मुटु बानिये। दीजे करामाति जग ष्यात सब मात किये कही झूठी बात एक राम पहिचानिये । देषे राम केसो कलि केद कियो कियें लिये दूजिये कृपाल स्नूमान जू दयाल हो। ताही समै फेलि गए कोटि कोटि कपि नये लोचे तन घेचे चीर भयो यो बिहाल हो। फोरे कोटि मारे चोउ किये गरे चोट पोट लीजे. कोन पोट जाय मानो प्रलय काल हो । भई तब प्रांषे दुष सागर कों चाषे अब वेई ने राषे भाषे वारो धन माल हो। प्राय पाय लिये तुम दिये हम प्रान पावे श्राप समझाव करामात नेकु लीजिये। लाज दबि गयो नृप तब राषि लियो कयो भयो घर राम जू को बेगी छोडि दीजिये। सुनि तजि दियो और कयो लेके कोट नयो अब ळू न रहे कोउ वा मे तन छीजिये। कासी जाय बंदाबन प्राय मिले नाभा बू सों सुन्यो हो कबित निज रीझ मति भीजिये। मदन मोल्न जू को दरसन कही सही राम ईष्ठ मेरे दृष्ट भाव मागी है। वेसोई सरूप कियो दियो ले दिषाय रूप मन अनुरूप छबि देषि नीकी लागी है। कालू कही कृष्ण अवतारी जू प्रसंस महा राम अंस सुनि बोले मति अनुरागी है। दसरथ सुत जानो सुंदर अनूप मानों ईसता बताई रति बीस गुनी जागी है॥