पृष्ठ:Garcin de Tassy - Chrestomathie hindi.djvu/९५

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॥ ७॥ . देखी तजि तब दीक्षा लीन्ही। तिन पीपा की पूजा तेली को जिवायो। एक दिना सीधो घर नाहीं। पीपा चले चोल्टा माई तेलिनि एक रूप अति भारी। ता पर स्वामी दृष्टि पर तेलिनि कहे लेछु रे तेला। तेहि पीपा सो भयो मग ऐसो तन जो सुमिरे रामू। तो हरि सकल संवारे कामू यहि ते ता को राम कहायो। तेलिनि क्रोधवंत दुख । कत मरे जब सती जो लोई। रामे राम पुकारे सोई॥ मो ते कहा मसखरी करद्र। कुबचन बोले तुम ही म पीपा के मन उपजो रोसू। भली कलत कत लावे दो मानुष मरे कहेगी जब हीं। जो पति मरे करोंगा तब इतनी कहि स्वामी घर जाई। तेलिनि के जिय संका चित पाकरष्यो वा के पति को। उपखो द्वार दोउ की मृतक भयो नहिं लाग्यो बारा। तब ही तेलिनि राम! रोवे कुटुंब सबे नर नारी। भेया बहिनि पिता महतार लेकु समेटि मृतक कल कालो। सुन्यो जु सोक सबनि । तेलिनि सती लोन तब लागो। सब सुख को सुख देख्न बलुत भांति वाजंत्र बजाए। मरघट पहुंचे स्वामी श्राए सती पुकारे रामे समू। नेक न जीभ लेय विनामू॥ लंसिके पीपा बूझे बाता। अब क्यों राम कहति हो म जीवत जब ते कम्यो न काङ। मस्ती बेर भयो क्यों म