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अशांति और असंतोष


पक्ष भी कहते हैं। सब अपने अपने ख़यालोंके मुताबिक इन दो शब्दोंका अर्थ करते हैं। यह सच है कि ये जो दल हुए हैं, उनके बीच ज़हर भी पैदा हुआ है। एक दल दूसरेका भरोसा नहीं करता, दोनों एक-दूसरेको ताना मारते हैं। सुरत कांग्रेसके समय करीब करीब मार-पीट भी हो गई। ये जो दो दल हुए हैं वह देशके लिए अच्छी निशानी<reg>चिह्न।</ref> नहीं है, ऐसा मुझे तो लगता है। लेकिन मैं यह भी मानता हूँ कि ऐसे दल लम्बे अरसे तक टिकेंगे नहीं। इस तरह कब तक ये दल रहेगे, यह तो नेताओं पर आधार रखता है।

अशांति और असंतोष

पाठक: तो आपने बंग-भंगको जागृतिका कारण माना। उससे फैली हुई अशांतिको ठीक समझा जाय या नहीं?

संपादक: इनसान नींदमें से उठता है तो अंगड़ाई लेता है, इधर-उधर घूमता है और अशान्त[१] रहता है। उसे पूरा भान[२]आनेमें कुछ वक्त लगता है। उसी तरह अगरचे बंग-भंगसे जागृति आई है, फिर भी बेहोशी नहीं गई है। अभी हम अंगड़ाई लेनेकी हालतमें है। अभी अशान्तिकी हालत है। जैसे नींद और जागके बीचकी हालत ज़रूरी मानी जानी चाहिये और इसलिए वह ठीक कही जायगी, वैसे बंगालमें और उस कारणसे हिन्दुस्तानमें जो अशान्ति फैली है वह भी ठीक है। अशान्ति है यह हम जानते हैं, इसलिए शान्तिका समय आनेकी शक्यता[३]है। नींदसे उठनेके बाद हमेशा अंगड़ाई लेनेकी हालतमें हम नहीं रहते, लेकिन देर-सबेर अपनी शक्तिके मुताबिक पूरे जागते ही हैं। इसी तरह इस अशान्तिमें से हम ज़रूर छूटेंगे। अशान्ति किसीको नहीं भाती।

पाठक: अशान्तिका दूसरा रूप क्या है?

संपादक: अशान्ति असलमें असंतोष है। उसे आजकल हम ‘अनरेस्ट' कहते हैं। कांग्रेसके जमानेमें वह ‘डिस्कन्टेन्ट' कहलाता था। मि. ह्यूम हमेशा

  1. बेचैन।
  2. सुध।
  3. इमकाम।