पृष्ठ:Hind swaraj- MK Gandhi - in Hindi.pdf/४९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ प्रमाणित हो गया।
१८
हिन्द स्वराज्य


और शरीरके सुखमें धन्यता–सार्थकता[१] और पुरुषार्थ[२] मानते हैं। इसकी कुछ मिसालें लें। सौ साल पहले यूरोपके लोग जैसे घरोंमें रहते थे उनसे ज्यादा अच्छे घरोंमें आज वे रहते हैं; यह सभ्यताकी निशानी मानी जाती है। इसमें शरीरके सुखकी बात है। इसके पहले लोग चमड़ेके कपड़े पहनते थे और भालोंका इस्तेमाल करते थे। अब वे लंबे पतलून पहनते हैं और शरीरको सजानेके लिए तरह-तरहके कपड़े बनवाते हैं; और भालेके बदले एकके बाद एक पांच गोलियां छोड़ सके ऐसी चक्करवाली बन्दूक इस्तेमाल करते हैं। यह सभ्यताकी निशानी है। किसी मुल्कके लोग, जो जूते वगैरा नहीं पहनते हों, जब यूरोपके कपड़े पहनना सीखते हैं, तो जंगली हालतमें से सभ्य हालतमें आये हुए माने जाते हैं। पहले यूरोपमें लोग मामूली हलकी मददसे अपने लिए जात-मेहनत करके ज़मीन जोतते थे। उसकी जगह आज भापके यंत्रोंसे हल चलाकर एक आदमी बहुत सारी ज़मीन जोत सकता है और बहुत-सा पैसा जमा कर सकता है। यह सभ्यताकी निशानी मानी जाती है। पहले लोग कुछ ही किताबें लिखते थे और वे अनमोल मानी जाती थीं। आज हर कोई चाहे जो लिखता है और छपवाता है और लोगोंके मनको भरमाता है। यह सभ्यताकी निशानी है। पहले लोग बैलगाड़ीसे रोज बारह कोसकी मंज़िल तय करते थे। आज रेलगाड़ीसे चार सौ कोसकी मंज़िल मारते हैं। यह तो सभ्यताकी चोटी[३] मानी गई है। यह सभ्यता जैसे जैसे आगे बढ़ती जाती है वैसे वैसे यह सोचा जाता है कि लोग हवाई जहाजसे सफ़र करेंगे और थोड़े ही घंटोंमें दुनियाके किसी भी भाग[४] में जा पहुंचेंगे। लोगोंको हाथ-पैर हिलानेकी ज़रूरत नहीं रहेगी। एक बटन दबाया कि आदमीके सामने पहननेकी पोशाक हाज़िर हो जायेगी, दुसरा बटन दबाया कि उसे अखबार मिल जायेंगे, तीसरा दबाया कि उसके लिए गाड़ी तैयार हो जायेगी; हर हमेशा नये भोजन मिलेंगे, हाथ-पैरका काम ही नहीं पड़ेगा, सारा काम कल[५] से ही किया जायगा। पहले जब लोग लड़ना चाहते थे तो एक-दूसरेका शरीर-बल आजमाते थे। आज तो

  1. पुरअरमानी।
  2. बहादुरी, बड़ा काम।
  3. शिखर।
  4. हिस्सा।
  5. यंत्र।