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हिन्दुस्तान कैसे आज़ाद हो?

पाठक : सभ्यताके बारेमें आपके विचार मैं समझ गया। आपने जो कहा उस पर मुझे ध्यान देना होगा। तुरन्त सबकुछ मंजूर कर लिया जाय, ऐसा आप नहीं मानते होंगे; ऐसी आशा भी नहीं रखते होंगे। आपके ऐसे विचारोंके अनुसार आप हिन्दुस्तानके आज़ाद होनेका क्या उपाय बतायेंगे?

संपादक : मेरे विचार सब लोग तुरन्त मान लें, ऐसी आशा मैं नहीं रखता। मेरा फ़र्ज इतना ही है कि आपके जैसे जो लोग मेरे विचार जानना चाहते हैं, उनके सामने अपने विचार रख दूँ। वे विचार उन्हें पसंद आयेंगे या नहीं आयेंगे, यह तो समय बीतने पर ही मालूम होगा।

हिन्दुस्तानकी आज़ादीके उपायोंका हम विचार कर चुके। फिर भी हमने दूसरे रूपमें उन पर विचार किया। अब हम उन पर उनके स्वरूपमें विचार करें।

जिस कारणसे रोगी बीमार हुआ हो वह कारण अगर दूर कर दिया जाय, तो रोगी अच्छा हो जायगा यह जगमशहूर बात है। इसी तरह जिस कारणसे हिन्दुस्तान गुलाम बना वह कारण अगर दूर कर दिया जाय, तो वह बँधनसे मुक्त[१] हो जायगा।

पाठक : आपकी मान्यताके मुताबिक हिन्दुस्तानकी सभ्यता अगर सबसे अच्छी है, तो फिर वह गुलाम क्यों बना?

संपादक : सभ्यता तो मैंने कही वैसी ही हैं, लेकिन देखनेमें आया है कि हर सभ्यता पर आफतें आती हैं। जो सभ्यता अचल है वह आखिरकार आफतोंको दूर कर देती है। हिन्दुस्तानके बालकोंमें कोई न कोई कमी थी, इसीलिए वह सभ्यता आफतोंसे घिर गई। लेकिन इस घेरेमें से छूटनेकी ताक़त उसमें है, यह उसके गौरव[२]को दिखाता है।

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  1. आज़ाद।
  2. बड़ाई।