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इटली और हिन्दुस्तान

संपादक : आपने इटलीका उदाहरण[१] ठीक दिया। मैज़िनी महात्मा था गैरीबाल्डी बड़ा योद्धा[२] था। दोनों पूजनीय थे। उनसे हम बहुत सीख सकते हैं। फिर भी इटलीकी दशा और हिन्दुस्तानकी दशामें फ़रक है।

पहले तो मैज़िनी और गैरीबाल्डीके बीचका भेद जानने लायक है। मैज़िनीके अरमान अलग थे। मैज़िनी जैसा सोचता था वैसा इटलीमें नहीं हुआ। मैज़िनीने मनुष्य-जातिके कर्तव्यके बारेमें लिखते हुए यह बताया है कि हरएकको स्वराज्य भोगना सीख लेना चाहिये। यह बात उसके लिए सपने जैसी रही। गैरीबाल्डी और मैज़िनीके बीच मतभेद[३] हो गया था, यह हमें याद रखना चाहिये। इसके सिवा, गैरीबाल्डीने हर इटालियनके हाथमें हथियार दिये और हर इटालियनने हथियार लिये।

इटली और आस्ट्रियाके बीच सभ्यताका भेद नहीं था। वे तो ‘चचेरे भाई’ माने जायेंगे। ‘जैसेको तैसा' वाली बात इटलीकी थी। इटलीको परदेशी (आस्ट्रियाके) जूएसे छुड़ानेका मोह गैरीबाल्डीको था। इसके लिए उसने कावूरके मारफ़त जो साजिशें[४] की, वे उसकी शूरताको बट्टा लगानेवाली हैं।

और अन्तमें नतीजा क्या निकला? इटलीमें इटालियन राज करते हैं इसलिए इटलीकी प्रजा सुखी है, ऐसा आप मानते हों तो मैं आपसे कहूँगा कि आप अंधेरेमें भटकते हैं। मैज़िनीने साफ साफ बताया है कि इटली आज़ाद नहीं हुआ है। विक्टर इमेन्युअलने इटलीका एक अर्थ किया, मैज़िनीने दूसरा। इमेन्युअल, कावूर और गैरीबाल्डीके विचारसे इटलीका अर्थ था इमेन्युअल या इटलीका राजा और उसके हुजूरी। मैज़िनीके विचारसे इटलीका अर्थ था इटलीके लोग-उसके किसान। इमेन्युअल वगैरा तो उनके (प्रजाके) नौकर थे। मैज़िनीका इटली अब भी गुलाम है। दो राजाओंके बीच शतरंजकी बाज़ी लगी थी; इटलीकी प्रजा तो सिर्फ़ प्यादा थी और है। इटलीके मजदूर

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  1. मिसाल।
  2. लड़वैया।
  3. अलग राय।
  4. षड्यंत्र।