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सत्याग्रह-आत्मबल


'हिस्टरी' अस्वाभाविक[१] बातोंको दर्ज करती है। सत्याग्रह स्वाभाविक है, इसलिए उसे दर्ज करनेकी ज़रूरत ही नहीं है।

पाठक : आपके कहे मुताबिक तो यही समझमें आता है कि सत्याग्रहकी मिसालें इतिहासमें नहीं लिखी जा सकतीं। इस सत्याग्रहकों ज्यादा समझनेकी ज़रूरत है। आप जो कुछ कहना चाहते हैं, उसे ज्यादा साफ शब्दोमें कहेंगे, तो अच्छा होगा।

संपादक : सत्याग्रह या आत्मबलको अंग्रेजीमें 'पैसिव रेज़िस्टेन्स' कहा जाता है। जिन लोगोंने अपने अधिकार पानेके लिए खुद दुख सहन किया था, उनके दुख सहनेके ढंगके लिए यह शब्द बरता गया है। उसका ध्येय[२] लड़ाईके ध्येयसे उल्टा है। जब मुझे कोई काम पसन्द न आये और वह काम मैं न करूँ, तो उसमें मैं सत्याग्रह या आत्मबलका उपयोग करता हूँ।

मिसाल के तौर पर, मुझे लागू होनेवाला कोई कानून सरकारने पास किया। वह कानून मुझे पसन्द नहीं है। अब अगर मैं सरकार पर हमला करके यह कानून रद करवाता हूँ, तो कहा जाएगा कि मैंने शरीर-बलका उपयोग किया। अगर मैं उस कानूनको मंज़ूर ही न करूँ और उस कारणसे होनेवाली सजा भुगत लूँ, तो कहा जाएगा कि मैंने आत्मबल या सत्याग्रहसे काम लिया। सत्याग्रहमें मैं अपना ही बलिदान देता हूँ।

यह तो सब कोई कहेंगे कि दूसरेका भोग-बलिदान लेनेसे अपना भोग देना ज्यादा अच्छा है। इसके सिवा, सत्याग्रहसे लड़ते हुए अगर लड़ाई गलत ठहरी, तो सिर्फ़ लड़ाई छेड़नेवाला ही दुख भोगता है। यानी अपनी भूल की सजा वह खुद भोगता है। ऐसी कई घटनायें हुई हैं जिनमें लोग गलतीसे शामिल हुए थे। कोई भी आदमी दावेसे यह नहीं कह सकता कि फलां काम खराब ही है। लेकिन जिसे वह खराब लगा, उसके लिए तो वह खराब ही है। अगर ऐसा ही है तो फिर उसे वह काम नहीं करना चाहिये और उसके लिए दुख भोगना, कष्ट सहन करना चाहिये। यही सत्याग्रहनी कुंजी है।

  1. गैर-कुदरती।
  2. मकसद।