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हिन्द स्वराज्य

पाठक : आप जो कहते हैं उस परसे मुझे लगता है कि सत्याग्रह कमज़ोर आदमियोंके लिए काफी कामका है। लेकिन जब वे बलवान बन जायें तब तो उन्हें तोप (हथियार) ही चलाना चाहिये।

संपादक : यह तो आपने बड़े अज्ञानकी बात कही। सत्याग्रह सबसे बड़ा-सर्वोपरी बल है। वह जब तोपबलसे ज्यादा काम करता है, तो फिर कमज़ोरोंका हथियार कैसे माना जायगा? सत्याग्रहके लिए जो हिम्मत और बहादुरी चाहिये, वह तोपका बल रखनेवालेके पास हो ही नहीं सकती। क्या आप यह मानते हैं कि डरपोक और कमज़ोर आदमी नापसन्द कानूनको तोड़ सकेगा? 'एक्स्ट्रीमिस्ट' तोपबल–पशुबलके हिमायती हैं। वे क्यों कानूनको माननेकी बात कर रहे हैं? मैं उनका दोष नहीं निकालता। वे दूसरी कोई बात कर ही नहीं सकते। वे खुद जब अंग्रेजोंको मारकर राज्य करेंगे तब आपसे और हमसे (जबरन्) कानून मनवाना चाहेंगे। उनके तरीकेके लिए यही कहना ठीक है। लेकिन सत्याग्रही तो कहेगा कि जो कानून उसे पसन्द नहीं हैं उन्हें वह स्वीकार नहीं करेगा, फिर चाहे उसे तोपके मुँह पर बाँधकर उसकी धज्जियां क्यों न उड़ा दी जायं!

आप क्या मानते हैं? तोप चलाकर सैकड़ोंको मारनेमें हिम्मतकी ज़रूरत है या हँसते-हँसते तोप के मुँह पर बँध कर धज्जियां उड़ने देनेमें हिम्मतकी ज़रूरत है? खुद मौतको हथेलीमें रखकर जो चलता-फिरता है वह रणवीर है या दूसरोंकी मौतको अपने हाथमें रखता है वह रणवीर है?

यह निश्चित मानिये कि नामर्द आदमी घड़ीभरके लिए भी सत्याग्रही नहीं रह सकता।

हाँ, यह सही है कि शरीरसे जो दुबला हो वह भी सत्याग्रही हो सकता है। एक आदमी भी (सत्याग्रही) हो सकता है और लाखों लोग भी हो सकते हैं। मर्द भी सत्याग्रही हो सकता है; औरत भी हो सकती है। उसे अपना लश्कर तैयार करनेकी ज़रूरत नहीं रहती। उसे पहलवानोंकी कुश्ती सीखनेकी ज़रूरत नहीं रहती। उसने अपने मन को काबूमें किया कि फिर वह वनराज-सिंहकी तरह गर्जना कर सकता है; और जो उसके दुश्मन बन बैठे हैं उनके दिल इस गर्जना से फट जाते हैं।