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पृष्ठ:Kabir Granthavali.pdf/७६५

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ग्रन्थावली]
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(।v) रूपकातिशयोक्ति - विष।
(v) पदमैत्री - भरम करम।

विशेष - (।) कबीर ज्ञान भक्त के रूप मे प्रकट हैं।

(॥) तजि करम विधि निषेद - कबीर शास्त्र विहित कर्मकाण्ड के प्रति विरोध प्रकट करते हैं।

(॥।) पौराणिक आरकानो की परम्परा का प्रयोग है। यहां कबीर वैष्णव भक्त की परम्परा मे दिखाई देते है -

मै हरि पतित पावन सुन।

xxx

 
ब्याघ गनिका गज अजामिल साखि निगमन भने।
और अवम अनेक तरे जत काप गने।
जानि नाम अजानि लीन्हो नरक जमपुर मने।
दस तुलसी सरन आयो, राखिये अपने।

(गोस्वामी तुलसीदास)

(।v) प्रयुक्त पौराणिक आख्यान इस प्रकार है -

अजामेल(अजामिल)-अजामिल एक ब्राह्मण था। वह बड़ा पापी था। उसके पुत्र का नाम 'नारायण' था। मृत्यु के समय उसने अपने पुत्र 'नारायण' को नाम लेकर पुकारा । 'नारायण' की पुकार सुनते ही भगवान के दूत वहा आ गए और यमदूतों से उसको छुडाकर भगवान के घाम को ले गये। इस प्रकार भगवन्नाम स्मरण मात्र से अजामिल का उद्धार हो गया ।

(ख) गज (गजेन्द्र या गजराज) - हाथियों का एक अत्यन्त बलवान राजा था। उसे अपने बल का बड़ा घमण्ड था। एक बार जब वह नदी मे पानी पी रहा था, तब एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। हाथि ने पूरा ज़ोर लगाया, परन्तु मगर ने उसका पैर नही छोड़ा। उलटे वह हाथी को जल के भीतर खीच ले गया। जब हाथी की सूड का ऊपरी भाग ही पानी के ऊपर रह गया, तब आते स्वर से उसने भगवान को पुकारा । उसकी पुकार सुन कर भगवान उसके रक्षाये भागे और उन्होने सुदर्शन चक्र द्वारा मगर का वध करके गजराज का उद्धार किया।

(ग) गनिका - यह पिंगला नाम की वेश्या थी। एक बार अपने व्यवसाय से निराश होकर उसने भगवान के भजन का संकल्प कर लिया और इसका उद्धार हो गया।

इसकी कथा एक अन्य प्रकार भी है। यह वेश्या अपने तोते को राम-राम पढा रही थी। बस,इसी राम-राम उच्चारण से उसका उद्धार हो गया-सुवा पढ़ावत गणिका तारी। तारी मीराबाई। इत्यादि।