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सवाई माधोपुर, धौलपुर, दौसा, जयपुर, अजमेर, भरतपुर तथा अलवर जिले आते हैं। जैसलमेर राज्य का सबसे बड़ा जिला है। यह लगभग ३८,४०० वर्ग किलोमीटर में फैला है। सबसे छोटा जिला है धौलपुर जो जैसलमेर के दसवें भाग बराबर है।

आज के भूगोल वाले इस सारे हिस्से को चार भागों में बांटते हैं। मरुभूमि को पश्चिमी बालू का मैदान कहा जाता है या शुष्क क्षेत्र भी कहा जाता है। उससे लगी पट्टी अर्धशुष्क क्षेत्र कहलाती है। इसका पुराना नाम बागड़ था। फिर अरावली पर्वतमाला है और मध्यप्रदेश आदि से जुड़ा राज्य का भाग दक्षिणी-पूर्वी पठार कहलाता है। इन चार भागों में सबसे बड़ा भाग पश्चिमी बालू का मैदान यानी मरुभूमि का क्षेत्र ही है। इसका एक पूर्वी कोना उदयपुर के पास है, उत्तरी कोना पंजाब छूता है और दक्षिणी कोना गुजरात। पश्चिम में पूरा का पूरा भाग पाकिस्तान के साथ जुड़ा है।

Rajasthan Ki Rajat Boondein (Hindi).pdf

मरुभूमि भी सारी मरुमय नहीं है। पर जो है, वह भी कोई कम नहीं। इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, नागौर, चुरू और श्रीगंगानगर जिले समा जाते हैं। इन्हीं हिस्सों में रेत के बड़े-बड़े टीले हैं, जिन्हें धोरा कहा जाता है। गर्मी के दिनों में चलने वाली तेज आंधियों में धीरे 'पंख' लगा कर इधर से उधर उड़ चलते हैं। तब कई बार रेल की पटरियां, छोटी-बड़ी सड़कें और राष्ट्रीय मार्ग भी इनके नीचे दब जाते हैं। इसी भाग में वर्षा सबसे कम होती है। भूजल भी खूब गहराई पर है। प्राय: सौ से तीन सौ मीटर और वह भी ज्यादातर खारा है।

अर्धशुष्क कहलाने वाला भाग विशाल मरुभूमि दक्षिण-पश्चिम तक लंबा फैला है। यहीं से वर्षा का आंकड़ा थोड़ा ऊपर चढ़ता है। तब भी यह २५ सेंटीमीटर से ५० सेंटीमीटर के बीच झूलता है और देश की औसत वर्षा से आधा ही बैठता है। इस भाग में कहीं-कहीं दोमट मिट्टी है तो बाकी में वही चिर परिचित रेत। 'मरु विस्तार' को रोकने की तमाम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय योजनाओं को धता बताकर आंधियाँ इस रेट को अरावली के दर्रों से पूर्वी भाग में भी ला पटकती हैं। ये छोटे-छोटे दरें ब्यावर, अजमेर और सीकर के पास हैं।

इस क्षेत्र में व्यावर, अजमेर, सीकर, झुंझुनू जिले हैं और एक तरफ नागौर, जोधपुर, पाली, जालौर और चुरू का कुछ भाग आता है। भूजल यहां भी सौ से तीन सौ मीटर