पृष्ठ:Ramanama.pdf/१५

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रामनाम : हमारा अकमात्र आधार राम, अल्लाह, गॉड सब मेरे नजदीक अकार्थक शब्द है। मैने देखा कि सीधे-भोले लोगोने धोखेसे अपना यह खयाल बना लिया है कि मुसीबतके समय मै अनको दिखाी देता हूँ ! मै अिस वहमको दूर कर देना चाहता है। मै किसीको दर्शन नहीं देता। अक नश्वर शरीर पर भरोसा रखना महज अनका भ्रम है। अिसलि मेने अनके सामने अंक सादा और सरल नुस्खा रखा है, जो कभी बेकार नही जाता- अर्थात् हर रोज सुबह सूरज निकलनेके पहले और शामको सोनेके वक्त अपनी प्रतिज्ञाओको पूरी करनेके लिओ औश्वरकी सहायता मागना। लाखो हिन्दू श्रीश्वरको रामके नामसे पहचानते है। बचपनमे जब-जब मैं डरता था, तब मुझे रामनाम लेनेको कहा जाता था। मेरे कितने ही साथी असे है, जिन्हे मुसीबतके वक्त रामनामसे बडी तसल्ली मिली है। मैने धाराला और अछूतोको भी रामनाम बताया। मैं अपने अन पाठकोके सामने भी अिसे पेश करता है, जिनकी दृष्टि धुधली नहीं हुभी है और जिनकी श्रद्धा बहुत विद्वत्ता प्राप्त करनेसे मन्द नही हो गी है। विद्वत्ता हमे जीवनकी अनेक अवस्थाओसे पार ले जाती है, पर सकट और प्रलोभनके समय वह हमारा साथ बिलकुल नहीं देती। अस हालतमें अकेली श्रद्धा ही हमे भुबारती है। रामनाम अन लोगोके लिओ नही है, जो मीश्वरको हर तरहसे फुसलाना चाहते है और हमेशा अपनी रक्षाकी आशा अससे लगाये रहते है। यह अन लोगोके लिओ है, जो जीश्वरसे डर कर चलते है, और जो सयमपूर्वक जीवन बिताना चाहते है लेकिन अपनी निर्बलताके कारण असका पालन नहीं कर पाते। हिन्दी नवजीवन, २२-१-१९२५