पृष्ठ:Ramanama.pdf/१७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ जाँच लिया गया।


भगवानकी मदद मागो लोगोकी सेवा किये बिना या अनके हितमे अपना हित माने बिना मोक्ष पाना मै असम्भव मानता हूँ। हिन्दी नवजीवन, २१-१०-१९२६ सेवाकार्य या माला-जप? स०-मेवाकार्यके कठिन अवसरो पर भगवद्भक्तिके नित्य नियम नही निम पाते, तो क्या जिसमे कोजी हर्ज है? दोनोमे से किसको प्रधानता दी जाय, सेवाकार्यको अथवा माला-जपको? ज -कठिन सेवाकार्य हो या अससे भी कठिन अवसर हो, तो भी भगवद्भक्ति यानी रामनाम बन्द हो ही नहीं सकता। असका बाह्य रूप प्रसगके मुताबिक बदलता रहेगा। माला छूटनेसे रामनाम, जो हृदयमे अकित हो चुका है, थोडे ही छूट सकता है? हरिजनसेवक, १७-२-१९४६ भगवानकी मदद मांगो मैं सारे हिन्दुस्तानके विद्यार्थियोके साथ होनेवाले अपने पत्रव्यवहारसे जानता है कि ढेरो पुस्तको द्वारा पाये हमे ज्ञानसे अपने दिमागोको भर कर वे कैसे पगु बन गये है। कुछ तो अपने दिमागका सतुलन खो बैठे है, कुछ पागल-से हो गये है, तो कुछ अनीतिकी राह पर चल पड़े है-जिससे वे अपने-आपको रोक नही सकते। अनकी यह बात सुनकर मेरा हृदय सहानभूति और दयासे भर जाता है कि अधिकसे अधिक प्रयत्न करके भी वे अपने जीवनको बदल नही सकते। वे दुखी होकर मुझसे पछते है "हमे बताजिये कि शैतानसे हम कैसे पिड छुडाये? जिस अनीति और अपवित्रता- ने हमे धर दबोचा है, अससे हम अपने-आपको कैसे छुडाये ?" जब मै अन्हे रामनाम जपने और भगवानके सामने झुक कर असकी सहायता मागनेकी बात कहता है, तो वे मेरे पास आकर कहते है "हम नही