पृष्ठ:Ramanama.pdf/१८

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R • रामनाम जानते भगवान कहा है? हम नही जानते प्रार्थना करना क्या होता है?” विद्यार्थियोकी आज ऐसी दयनीय स्थिति हो गई है । तामिल भाषाका एक वचन मै कभी भूलता नही । उसका अर्थ है “ निराधारका आधार भगवान है। ” अगर आप उससे सहायताकी प्रार्थना करना चाहते है, तो आप अपने सच्चे रूपमे उसके पास जाये, किसी तरहका सकोच या दुराव-छिपाव न रख उसकी शरण ले और इस बातकी आशका न रखे कि आप जैसे अधम और पतितको वह कैसे सहायता दे सकता है- कैसे उबार सकता है। जिसने अपनी शरण मे आये लाखो-करोडोकी सहायता की, वह क्या आपको असहाय छोड देगा ? वह किसी तरहका पक्षपात और भेदभाव नही रखता । आप देखेगे कि वह आपकी हरएक प्रार्थना सुनता है। अधमसे अधमकी भी प्रार्थना भगवान सुनेगा * यह बात मै अपने अनुभवसे कहता हू । मै इस नरककी यातनाओसे गुजर चुका हू। पहले आप भगवानकी शरण जाइये और आपको सब कुछ मिल जायगा । यॱग इनडिया, ४-४-१९२९

  • लेकिन प्रार्थना केवल शब्दोकी या कानोकी कसरत ही नही है। वह किसी निरर्थक मत्र या सूत्रका जप नही है। अगर रामनाम आत्माको जाग्रत न कर सकेॱ, तो आप उसका कितना भी जप क्यो न करे, सब व्यर्थ जायगा। यदि आप शब्दोके बिना भी हृदय से भगवानकी प्रार्थना करे, तो वह उस प्रार्थनासे कही अच्छी है जिसमे शब्द तो बहुत है, परन्तु हृदय नही है। प्रार्थना उस आत्माकी मागके स्पष्ट उत्तरमे होनी चाहिये, जो हमेशा उसकी भूखी रहती है। और जिस तरह भूखा आदमी स्वादिष्ठ भोजन पाकर प्रसन्न होता है, उसी तरह भूखी आत्मा हार्दिक प्रार्थनासे आनन्दका अनुभव करती है। मै अपने और अपने साथियोके अनुभवसे यह बात कहता हू कि जिसने प्रार्थना के चमत्कारका अनुभव किया है, वह भोजनके बिना तो कई दिनो तक रह सकता है, लेकिन प्रार्थनाके बिना एक क्षण भी नही रह सकता । क्योकि प्रार्थनाके बिना आन्तरिक शान्ति नही मिलती । -यग ॱइडिया, २३-१-१९३०