पृष्ठ:Ramanama.pdf/२१

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रामधुन स० --- क्या रामनामको हृदयमे ही रखना काफी नहीं है ? या असके अच्चारणमे कोसी वास विशेषता है ? ज...- मेरा विश्वास है कि रामनामके अच्चारणका विशेष महत्त्व है। अगर कोसी जानता है कि ीश्वर सचमुच असके हृदयमे बसता है, तो मैं मानता हूँ कि असके लिओ मुहसे रामनाम जपना जरूरी नही है। लेकिन मै जैसे किसी आदमीको नही जानता। अलटे, मेरा अपना अनुभव कहता है कि मुहसे रामनाम जपनेमे कुछ अनोखापन है। क्यो या कैसे, यह जानना आवश्यक नही। हरिजनसेवक, १४-३-१९४६ रामधुन गाधीजीने कहा-जिन्हे थोडा भी अनुभव है, वे दिलसे गायी जानेवाली रामधुनकी, यानी भगवानका नाम जपनेकी शक्तिको जानते है। मै लाखो सिपाहियोके अपने बैण्डकी लयके साथ कदम अठाकर मार्च करनेसे पैदा होने- वाली ताकतको जानता ह। फौजी ताकतने दुनियामे जो बरबादी की है, असे रास्ते चलनेवाला भी देख सकता है। हालाकि यह कहा जाता है कि लडाजी खतम हो गयी, फिर भी असके बादके नतीजे लडाओसे भी ज्यादा बरे साबित हो है। यही फौजी ताकतके दिवालियापनका सबूत है। मै बिना किसी हिचकिचाहटके यह कह सकता है कि लाखो आदमियो द्वारा सच्चे दिलसे अंक ताल और अक लयके साथ गामी जानेवाली रामधुनकी ताकत फौजी ताकतके दिखावेसे बिलकुल अलग और की गुना बढी-चढी होती है। दिलसे भगवानका नाम लेनेसे आजकी बरबादीकी जगह टिका शान्ति और आनन्द पैदा होगा। हरिजनसेवक ३१-८-१९४७