पृष्ठ:Ramanama.pdf/२७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ जाँच लिया गया।
१५
राम कौन ?

स०-- आप कहा करते है कि प्रार्थनामे प्रयुक्त रामका आशय दशरथके पुत्र रामसे नही। आपका आशय जगन्नियतासे होता है। हमने भलीभाति देखा है कि रामधुनमे ‘राजाराम, सीताराम’, ‘राजाराम, सीताराम’ का कीर्तन होता है। और जयकार भी ‘सीतापति रामचन्द्रकी जय' का लगता है। मै विनम्र भावसे पूछता हू कि ये सीतापति राम कौन है? ये राजाराम कौन है? क्या ये दशरथके सुपुत्र राम नही है ?

ज० - रामधुनमे ‘राजाराम ’, ‘सीताराम’ अवश्य रटा जाता है। वह दशरथ-नन्दन राम नही तो कौन है ? तुलसीदासजीने तो अिसका अुत्तर दिया ही है, तो भी मुझे कहना चाहिये कि मेरी राय कैसे बनी है। रामसे रामनाम बडा है। हिन्दू धर्म महासागर है। उसमे अनेक रत्न भरे है। जितना गहरे पानीमे जाओ, उतने ज्यादा रत्न मिलते है। हिन्दू धर्ममे ईश्वरके अनेक नाम है। सैकडो लोग राम-कृष्णको ऐतिहासिक व्यक्ति मानते है, और मानते है कि जो राम दशरथके पुत्र माने जाते है, वही ईश्वरके रूपमे पृथ्वी पर आये और उनकी पूजासे आदमी मुक्ति पाता है। ऐसा ही कृष्णके लिऐ है। इतिहास, कल्पना और शुद्ध सत्य आपसमे इतने ओतप्रोत है कि उन्हे अलग करना लगभग असंभव है। मैने अपने लिए ईश्वरकी सब सज्ञाये रखी है। और उन सबमे मै निराकार, सर्वस्थ रामको ही देखता हू। मेरे लिए मेरा राम सीतापति दशरथ-नन्दन कहलाते हुए भी वह सर्वशक्तिमान इश्वर ही है, जिसका नाम हृदयमें होनेसे मानसिक, नैतिक और भौतिक सब दुखोका नाश हो जाता है।

गाधीजीने आगे कहा “जिस रामके नामको मैं सब बिमारियोंकी रामबाण दवा कहता हूं, वह राम न तो ऐतिहासिक राम है, और न उन लोगों का राम है, जो उसका अिस्तेमाल जादू-टोनेके लिए करते है। सब रोगोकी रामबाण दवाके रूपमे मै जिस रामका नाम सुझाता हू, वह तो खुद ईश्वर ही है, जिसके नामका जप करके भक्तोने शुद्धि और शांति

१९