पृष्ठ:Ramanama.pdf/३२

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२४ रामनाम और कौनसा साध्य है, यह फर्क करना मुश्किल हो जाता है। एकादश व्रतोमे से सत्यको ही ले, तो पूछा जा सकता है कि क्या सत्य साधन है और राम साध्य ? या राम साधन है और सत्य साध्य है? मगर मै सीधी बात पर आऊ । ब्रह्मचर्यका आजका माना हुआ अर्थ ले, तो वह है - जननेद्रिय पर काबू पाना । इस सयमका सुनहला रास्ता और उसकी अमर रक्षा रामनाम ही है। हरिजनसेवक, २२-६-१९४७ १९ रामनाम और कुदरती ईलाज दूसरी सब चीजोकी तरह मेरी कुदरती ईलाजकी कल्पनाने भी धीरेधीरे विकास किया है। बरसोसे मेरा यह विश्वास रहा है कि जो मनुष्य अपनेमे ईश्वरका अस्तित्त्व अनुभव करता है, और इस तरह विकाररहित स्थिति प्राप्त कर चुकता है, वह लम्बे जीवनके रास्तेमे आनेवाली सारी कठिनाईयोको जीत सकता है। मैने जो देखा और धर्मशास्त्रोमे पढ़ा है, उसके आधार पर मै इस नतीजे पर पहुचा हू कि जब मनुष्यमे उस अदृश्य शक्तिके प्रति पूर्ण जीवित श्रद्धा पैदा हो जाती है, तब उसके शरीरमे भीतरी परिवर्तन होता है। लेकिन यह सिर्फ इच्छा करने मात्रसे नही हो जाता । इसके लिए हमेशा सावधान रहने और अभ्यास करनेकी जरूरत रहती है। दोनोके होते हुए भी ईश्वर-कृपा न हो, तो मानव-प्रयत्न व्यर्थ जाता है। प्रेस रिपोर्ट, १२-६-१९४५