पृष्ठ:Ramanama.pdf/३३

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२० कुदरती ईलाज कुदरती ईलाज और उपचारका अर्थ है, ऐसे उपचार या ईलाज जो मनुष्यके लिए योग्य हो । मनुष्य यानी मनुष्यमात्र । मनुष्यमे मनुष्यका शरीर तो है ही, लेकिन उसमे मन और आत्मा भी है। इसलिए सच्चा कुदरती ईलाज तो रामनाम ही है। इसलिए रामबाण शब्द निकला है। रामनाम ही रामबाण ईलाज है। मनुष्यके लिए कुदरतने उसीको योग्य माना है। कोई भी व्याधि हो, अगर मनुष्य हृदयसे रामनाम ले, तो उसकी व्याधि नष्ट होनी चाहिए। रामनाम यानी ईश्वर, खुदा, अल्लाह, गॉड । ईश्वरके अनेक नाम हैं, उनमे से जो जिसे ठीक लगे, उसे वह चुन ले, लेकिन उसमे हार्दिक श्रद्धा हो, और श्रद्धाके साथ प्रयत्न हो । वह कैसे ? जिस चीजका मनुष्य पुतला बना है, उसीसे वह ईलाज ढूढे । पुतला पृथ्वी, पानी, आकाश, तेज और वायुका बना है। इन पाच तत्त्वोसे जो मिल सके सो ले । उसके साथ रामनाम तो अनिवार्य रूपसे चलता ही रहे। नतीजा यह आता है कि इतना होते हुए भी शरीरका नाश हो, तो होने दे और हर्षपूर्वक शरीर छोड़ दे। दुनियामे ऐसा कोई ईलाज नही निकला है, जिससे शरीर अमर बन सके। अमर तो आत्मा ही है। उसे कोई मार नहीं सकता । उसके लिए शुद्ध शरीर पैदा करनेका प्रयत्न तो सब करे। उसी प्रयत्नमे कुदरती ईलाज अपने आप मर्यादित हो जाता है। और इससे आदमी बड़े-बड़े अस्पतालो और योग्य डॉक्टरो वगैराकी व्यवस्था करनेसे बच जाता है। दुनियाके असख्य लोग दूसरा कुछ कर भी नही सकते। और जिसे असख्य नही कर सकते, उसे थोड़े क्यो करे? २५