पृष्ठ:Ramanama.pdf/३५

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सब रोगोंका ईलाज २७ भी देखनेको मिलता है। “ फला-फलाने मुझको चूरन दिया और मै अच्छा हो गया । ” कुछ लोग ऐसा कहनेवाले निकल आते है और वैद्यका व्यापार चल पड़ता है । वैद्यो और डॉक्टरोके रामनाम रटनेकी सलाह देनेसे रोगीका दुख दूर नही होता । जब वैद्य खुद उसके चमत्कारको जानता है, तभी रोगीको भी उसके चमत्कारका पता चल सकता है। रामनाम पोथीका बैंगन नही, वह तो अनुभवकी प्रसादी है। जिसने उसका अनुभव प्राप्त किया है, वही यह दवा दे सकता है, दूसरा नही । vaidhrAjne मुझे चार मत्र लिखकर दिये है। उनमे चरक ऋषिका मत्र सीधा और सरल है। उसका अर्थ यह है चराचरके स्वामी विष्णुके हजार नामोमे से एकका भी जप करनेसे सब रोग शान्त होते है। विष्णु सहस्त्रमूर्धान चराचरपति विभुम् । स्तुवन्नामसहस्रेण ज्वरान् सर्वान् व्यपोहति। -- चरक चिकित्सा, अ० ३ - श्लोक ३११ हरिजनसेवक, २४-३-१९४६ २२ सब रोगोंका ईलाज गाधीजीने कहा -“ अगर आप अपने दिलसे डरको दूर कर दे, तो मै कहूगा कि आपने मेरी बहुत मदद की। लेकिन वह कौनसी जादूई चीज है, जो आपके इस डरको भगा सकती है? वह है रामनामका अमोघ मत्र । शायद आप कहेगे कि रामनाममे आपको विश्वास नही, आप उसे नही जानते। लेकिन उसके बगैर आप एक सास भी नही ले सकते। उसे • आप चाहे ईश्वर कहिये, अल्लाह कहिये, गॉड कहिये, या अहुरमज्द कहिये । दुनियामे जितने इन्सान है, उतने ही उसके बेशुमार नाम है। विश्वमे उसके जैसा दूसरा कोई नही। वही एक महान है, विभु है। दुनियामे उससे बड़ा और कोई नही। वह अनादि, अनन्त, निरजन और निराकार है। मेरा राम ऐसा है। एक वही मेरा स्वामी और मालिक है।”