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२८ रामनाम

गाधीजीने रुधे हुए कठसे इस बातका जिक्र किया कि बचपनमे वे बहुत डरपोक थे और परछाईसे भी डरा करते थे । उन दिनो उनकी धाय रभाने उन्हे डर भगानेके लिए रामनामका मंत्र सिखाया था । उन्होने कहा -“रभा मुझसे कहती कि ‘जब डर मालूम हो, रामका नाम लिया करो । वह तुम्हारी रक्षा करेगा' । उस दिनसे रामनाम सब तरहके डरोके लिए मेरा अचूक सहारा बन गया है। “ राम पवित्र लोगोके दिलमे हमेशा रहता है। जिस तरह बगालमे श्री चैतन्य और श्री रामकृष्णका नाम मशहूर है, उसी तरह काश्मीरसे कन्याकुमारी तक हरएक हिन्दू घर जिनके नामसे वाकिफ है, उन भक्त-शिरोमणि तुलसीदासने अपने अमर महाकाव्य रामायणमे हमको रामनामका मंत्र दिया है। अगर आप रामनामसे डर कर चले, तो दुनियामे आपको क्या राजा, क्या रक, किसीसे डरनेकी जरूरत न रह जाए । ‘अल्लाहो अकबर' की पुकारोसे आपको क्यो डरना चाहि़ए? इस्लामका अल्लाह तो बेगुनाहोकी हिफाजत करनेवाला है। पूर्वी बगालमे जो वारदाते हुई है, उन्हे पैगम्बर साहबका इस्लाम मजूर नही करता । “ अगर ईश्वरमे आपकी श्रद्धा है, तो किसकी ताकत है कि आपकी औरतो और लडकियोकी इज्जत पर हाथ डाले ? इसलिए मुझे उम्मीद है कि आप लोग मुसलमानोसे डरना छोड देगे । अगर आप रामनाममे विश्वास करते है, तो आपको पूर्वी बगाल छोडनेकी बात नही सोचनी चाहिए। जहा आप पैदा हुए और पले-पुसे, वही आपको रहना चाहिए और जरूरत पडने पर बहादुर मर्दो और औरतोकी तरह अपनी आबरूकी हिफाजत करते हुए वही मर जाना चाहिए। खतरेका सामना करनेके बदले उससे दूर भागना उस श्रद्धासे इनकार करना है, जो मनुष्यकी मनुष्य पर,ईश्वर पर और अपने-आप पर रहती है । अपनी श्रद्धाका ऐसा दिवाला निकालनेसे बेहतर तो यह है kee इन्सान डूब कर मर जाय। हरिजनसेवक, २४-११-१९४६