पृष्ठ:Ramanama.pdf/३९

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२४ आम लोगोंके लिए इलाज

 “आपको यह जानकर खुशी होगी कि ४० बरससे भी पहले जब मैने कुनेकी ‘न्यू सायन्स ऑफ हीलिग' और जुस्टकी ‘रिटर्न टु नेचर' नामकी किताबे पढी, तभीसे मै कुदरती इलाजका पक्का हिमायती हो गया था । लेकिन मुझे यह कबूल करना चाहिए कि मै ‘रिटर्न टु नेचर' का पूरा-पूरा मतलब नही समझ सका हू-इसकी वजह मेरी इच्छाकी कमी नही, बल्कि मेरे ज्ञानकी कमी है। अब मै कुदरती इलाजका ऐसा तरीका खोजनेकी कोशिश कर रहा हू, जो हिन्दुस्तानके करोडो गरीबोको फायदा पहुचा सके । मै सिर्फ ऐसे ही इलाजके प्रचारकी कोशिश करता हू, जो मिट्टी, पानी, धूप, हवा और आकाशके इस्तेमालसे किया जा सके । इस इलाजसे मनुष्यको कुदरतन् यह बात समझमे आ जाती है कि दिलसे भगवानका नाम लेना ही सारी बीमारियोका सबसे बडा इलाज है । इस भगवानको

करोड अल्लाहके नामसे पहचानते है। दिलसे भगवानका नाम लेनेवाले मनुष्यका यह फर्ज हो जाता है कि वह कुदरतके उन नियमोको समझे और उनका पालन करे, जो भगवानने मनुष्यके लिए बना दिए है। यह दलील हमे इस नतीजे पर पहुचाती है कि बीमारीका इलाज करनेसे उसे रोकना बेहतर है। इसलिए मै लाजिमी तौर पर लोगोको सफाईके नियम समझाता hoo, यानी उन्हे मन, शरीर और उसके आसपासके वातावरणकी सफाईका उपदेश करता हू।” हरिजनसेवक, १५-६-१९४७ ३१