पृष्ठ:Ramanama.pdf/४७

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उरुळीकाचनमें ३९ “ इन सबमे सबसे जरूरी चीज हवा है। आदमी बिना खाये कई हफ्तो तक जी सकता है, पानीके बिना भी वह कुछ घण्टे बिता सकता है, लेकिन हवाके बिना तो कुछ ही मिनटोमे उसकी देहका अन्त हो सकता है। इसीलिए ईश्वरने हवाको सबके लिए सुलभ बनाया है। अन्न और पानीकी तगी कभी-कभी पैदा हो सकती है, हवाकी कभी नही । ऍसा होते हुझे भी हम बेवकूफोकी तरह अपने घरोके अन्दर खिडकी और दरवाजे बन्द करके सोते है और ईश्वरकी प्रत्यक्ष प्रसादी-सी ताजी और साफ हवासे फायदा नही उठाते। अगर चोरोका डर लगता है, तो रातमे अपने घरोके दरवाजे और खिडकिया बन्द रखिये, लेकिन खुद अपनेको उनमे बन्द रखनेकी क्या जरूरत है? “ साफ और ताजी हवा पानेके लिए आदमीको खुलेमें सोना चाहिये । लेकिन खुलेमे सोकर धूल और गन्दगीसे भरी हवा लेनेका कोई मतलब नही । इसलिए आप जिस जगह सोये, वहा धूल और गन्दगी नही होनी चाहिये। धूल और सरदीसे बचनेके लिए कुछ लोग सिरसे पैर तक ओढ लेनेके आदी होते है। यह तो बीमारीसे भी बदतर अिलाज हुआ । दूसरी बुरी आदत मुहसे सास लेनेकी है। नथनोकी राह फेफडोमे पहुचनेवाली हवा छनकर साफ हो जाती है, और उसे जितना गरम होना चाहिये उतनी गरम भी वह हो लेती है । ` “ जो आदमी जहा चाहे वहा और जिस तरह चाहे उस तरह थूक कर, कूडा-करकट डालकर या गन्दगी फैलाकर या दूसरे तरीकोसे हवाको गन्दी करता है, वह कुदरतका और मनुष्योका गुनहगार है। मनुष्यका शरीर ईश्वरका मदिर है। उस मन्दिरमे जानेवाली हवाको जो गन्दी करता है, वह मन्दिरको भी बिगाडता है। उसका रामनाम लेना फजूल है।” हरिजनसेवक, ७-४-१९४६