पृष्ठ:Ramanama.pdf/४९

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२९ गरीबोंके लिए कुदरती इलाज कुदरती उपचारमे जीवन-परिवर्तनकी बात आती है। यह कोई वैद्यकी दी हुई पुडिया लेनेकी बात नही है, और न अस्पताल जाकर मुफ्त या फीस देकर दवा लेने या उसमे रहनेकी ही बात है। जो मुफ्त दवा लेता है, वह भिक्षुक बनता है। जो कुदरती उपचार करता है, वह कभी भी भिक्षुक नही बनता । वह अपनी प्रतिष्ठा बढाता है और अच्छा बननेका उपाय खुद ही कर लेता है। वह अपने शरीरमे से जहर निकालकर ऍसी कोशिश करता है कि जिससे दुबारा बीमार न पड सके । कुदरती इलाजमे मध्यबिन्दु तो रामनाम ही है न ? रामनामसे आदमी सब रोगोसे सुरक्षित बनता है। शर्त यह है कि नाम भीतरसे निकलना चाहिये। और, रामनामके भीतरसे निकलनेके लिए नियम-पालन जरूरी हो जाता है। उस हालतमे मनुष्य रोग-रहित होता है। इसमे न कष्टकी बात है, न खर्चकी । मोसम्बी खाना उपाचरका अनिवार्य अग नही है। पथ्य खाना -युक्ताहार लेना-अवश्य अनिवार्य अग है। हमारे देहात हमारी तरह ही कगाल है। देहातमे साग-सब्जी, फल, दूध वगैरा पैदा करना कुदरती इलाजका खास अग है। इसमे जो वक्त खर्च होता है, वह व्यर्थ तो जाता ही नही, बल्कि उससे सभी देहातियोको और आखिरकार सारे हिन्दुस्तानको लाभ होता है। हरिजनसेवक, २-६-१९४६ ४१