पृष्ठ:Ramanama.pdf/५३

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विश्वास-चिकित्सा और रामनाम ४५ आपकी क्षयकी बीमारीके कई कारण हो सकते है। यह भी कौन कह सकता है कि पच महाभूतोका आपने जरूरतके मुताबिक उपयोग किया या नही ? इसीलिए जहा तक मै कुदरतके नियमोको जानता हू और उन्हें सही मानता हू, वहा तक मै तो आपसे यही कहूगा कि कही-न-कही पच महाभूतोका उपयोग करनेमे आपने भूल की है। महादेव और रामकृष्ण परमहसके बारेमे आपने जो शका उठाई, उसका जवाब भी मेरी ऊपरकी बातमे आ जाता है। कुदरतके नियमको गलत कहनेके बजाय यह कहना ज्यादा युक्तिसगत मालूम होता है कि इन्होने भी कही-न-कही भूल की होगी । नियम कोई मेरा बनाया हुआ नहीं है, वह तो कुदरतका नियम है, कई अनुभवी लोगोने इसे कहा है। और इसी बातको मानकर मै चलनेकी कोशिश करता हू । आखिरकार मनुष्य अपूर्ण प्राणी है। और कोई अपूर्ण मनुष्य इसे कैसे जान सकता है ? डॉक्टर इसे नही मानते । मानते भी है तो उसका दूसरा अर्थ करते है। इसका मुझ पर कोई असर नही होता । नियमकी एसी ताईद करने पर भी मेरे कहनेका यह मतलब नही होता, न निकाला जाना चाहिये कि इससे ऊपरके किसी व्यक्तिका महत्त्व कम होता है। हरिजनसेवक, ४-८-१९४६ میی ३३ विश्वास-चिकित्सा* और रामनाम एक दोस्त उलाहना देते हुए लिखते है “ क्या आपका कुदरती इलाज और विश्वास-चिकित्सा कुछ मिलती-जुलती चीजे है? बेशक मरीजको इलाजमे श्रद्धा तो होनी चाहिये, लेकिन कई ऐसे इलाज है जो सिर्फ विश्वाससे ही रोगीको जूच्छा कर देते है, जैसे, माता (चेचक), पेटका दर्द वगैरा बीमारियोके । शायद आप जानते हो कि माताका, खासकर दक्षिणमे,' कोई इलाज नही किया जाता । इसे सिर्फ ईश्वरकी माया-मान लिया जाता है।

  • जिस इलाजकी नीव विश्वास पर हो ।

१ मद्रास राज्य ।