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५६ रामनास

खडा हो गया - इतना नजदीक खडा था कि पिस्तोल से निकली हुइ गोली का खोल बाद में बापू के कपडों की पर्त में उलझा हुआ मिला । सात कारतूसोवाली अॉटोमेटिक पिस्तोलसे जल्दी-जल्दी तीन गोलियां छूटी । पहली गोली नाभी से ढाई इंच ऊपर और मध्य रेखा से साढे तीन इंच दाहिनी तरफ पेट की दाहिनी बाजू मे लगी। दूसरी गोली मध्यरेखा से एक इं चकी दूरी पर दाहिनी तरफ घुसी और तीसरी गोली छाती की दाहिनी तरफ लगी । पहली और दूसरी गोली शरीर को पार कर के पीठ पर बाहर निकल आई । तीसरी गोली उनके फेफडे मे ही रुकी रही। पहले वार में उनका पाव, जो गोली लगने के वक्त आगे बढ रहा था, नीचे आ गया। दूसरी गोली छोडी गई, तब तक वे अपने पावों पर ही खडे थे। और उसके बाद वे गिर गये । उनके मुंह से आखिरी शब्द “ राम ! राम ! " निकले ।

    हरिजनसेवक, १५-२-१९४८
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                                प्रार्थना-प्रवचनों में से
                      रामनाम -- उसके नियम और अनुशासन
  गांधीजी ने कहा रामनाम आदमी को बीमारी में मदद कर सकता है, लेकिन उसके कुछ नियम और अनुशासन है। कोई जरूरत से ज्यादा खाना खाकर ‘रामनाम' जपे और फिर भी उसे पेट का दर्द हो, तो वह गाधी को दोष नहीं दे सकता। रामनाम का उचित ढगसे उपयोग किया जाय तभी उससे लाभ होता है। कोई आदमी रामनाम जपे और लूटपाट मचावे, तो वह मोक्ष की आशा नहीं कर सकता । वह सिर्फ उन्हीं के लिए है, जो आत्मशुद्धि के लिए उचित अनुशासन पालने के लिए तैयार है।
                                                          - बम्बई, १५-३-४६
                              सबसे असरकारक इलाज 

उरुव्ठीकाचन की प्रार्थना-सभा मे भाषण करते हुए गांधीजी ने कहा - रामधुन शारीरिक और मानसिक बीमारियों के लिए सबसे असरकारक इलाज है। कोई डॉक्टर या वैद्य दवा देकर बीमारी अच्छी करने का वचन नही