पृष्ठ:Ramanama.pdf/६९

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प्रार्थना-प्रवचनोंमें से ६१ नही ला सका हू । जब वह हालत पैदा हो जायगी, तब तो रामनाम रटना भी जरूरी न रह जायगा ।। * “ मुझे उम्मीद है कि मेरी गैरहाजिरीमे भी आप अपने घरोमे अलगअलग और एक साथ बैठकर रामनाम लेते रहेगे । सबके साथ मिलकर, सामूहिक रूपमे, प्रार्थना करनेका रहस्य यह है कि उसका एक-दूसरे पर जो शान्त प्रभाव पडता है, वह आध्यात्मिक उन्नतिकी राहमे मददगार हो सकता है। " -नई दिल्ली, २६-५-४६ रामनाम जैसा कोई जादू नहीं आजकी प्रार्थना-सभामे गाधीजीने कहा “ रामनाम सिर्फ कुछ खास आदमियोके लिए ही नहीं है, वह सबके लिजे है। जो रामका नाम लेता है, वह अपने लिए एक भारी खजाना जमा करता जाता है। और यह तो एक जैसा खजाना है, जो कभी खूटता ही नही। जितना इसमे से निकालो, उतना बढता ही जाता है। इसका अन्त ही नहीं है। और जैसा कि उपनिषद् कहता है ‘पूर्णमे से पूर्ण निकालो, तो पूर्ण ही बाकी रहता है', वैसे ही रामनाम तमाम बीमारियोका एक शर्तिया इलाज है, फिर चाहे वे शारीरिक हो, मानसिक हो, या आध्यात्मिक हो । “ लेकिन शर्त यह है कि रामनाम दिलसे निकले। क्या बुरे विचार आपके मनमे आते है? क्या काम या लोभ आपको सताते है? अगर जैसा है तो रामनाम जैसा कोई जादू नही ” और उन्होने अपना मतलब एक मिसाल देकर समझाया “ फर्ज कीजिये कि आपके मनमे यह लालच पैदा होता है कि बगैर मेहनत किये, बेईमानीके तरीकेसे, आप लाखो रुपये कमा लें। लेकिन अगर आपको रामनाम पर श्रद्धा है, तो आप सोचेगे कि अपने बीबी-बच्चोके लिए आप ऍसी दौलत क्यो इकट्ठी करे जिसे वे शायद उडा दे ? अच्छे चाल-चलन और अच्छी तालीम और ट्रेनिगके रूपमे उनके خه های خی

  • मै अपने जीवनमे जैसे समयकी जरूर आशा करता हू, जब रामनामका जप भी एक रुकावट हो जायगा। जब मै यह समझ लूगा कि राम वाणीसे भी परे है, तब मुझे उसका नाम दोहरानेकी जरूरत नही रह जायगी । --यग इंडिया, १४-८-'२४