पृष्ठ:Ramanama.pdf/७२

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६४ रामनाम “तो आप यह जान ले कि पहले तो ईश्वर अपने भक्तको मुसीबतोंसे बचा ही लेता है, और अगर मुसीबत आ ही पडे, तो भक्त शान्तिसे ईश्वर की मरजीके सामने सिर झुकाकर खुशी-खुशी उसे सह लेता है।” - नई दिल्ली, २०-६-४६ रामनामका महत्त्व आजकी प्रार्थना-सभामे गाधीजीने पूछा “ क्या मै एक नई किस्मके अन्ध-विश्वासका प्रचार कर रहा हू ? ईश्वर कोई व्यक्ति नही । वह सब जगह मौजूद है और सर्वशक्तिमान है। जो भी कोई उसे अपने दिलमे जगह देता है, वह उसी अजीब आशाओं और उमगोसे भर जाता है, जिनकी ताकतका मुकाबला भाप और बिजलीकी ताकतसे नही किया जा सकता। वह ताकत तो उससे भी ज्यादा सूक्ष्म होती है। रामनाम कोई जादू-टोना नही है। वह तो अपने समूचे अर्थके साथ ही लिया जाना चाहिये । रामनाम गणितका एक ऐसा सूत्र या फॉर्मूला है, जो थोडेमे बेहिसाब खोज और तजरबे (प्रयोग ) को जाहिर कर देता है। सिर्फ मुहसे रामनाम रटनेसे कोई ताकत नही मिलती । ताकत पानेके लिए यह जरूरी है कि सोच-समझकर नाम जपा जाय और जपकी शतोंका पालन करते हुझे जिन्दगी बिताई जाय । ईश्वरका नाम लेनेके लिए मनुष्यको ईश्वरमय या खुदाकी जिन्दगी बितानी चाहिये।” -पूना, २-७-४६ भीतरी और बाहरी सफाई आजकी प्रार्थना-सभा मे गाधीजी ने हरिजन-बस्तीके आसपासकी गन्दगीका जित्र किया, जिसमे वे रहते थे । उन्होने कहा “ यहा मैं एक ओवरसीयरके मकानमे रहता हू। मेरी समझमे नही आता कि क्यो ये ओवरसीयर और यहाकी सफाई का इन्तजाम करनेवाले यानी म्युनिसिपैलिटी और पी० डब्ल्यु० डी० के लोग इस सारी गन्दगीको बरदाश्त करते है। मेरे यहा आने और रहनेसे फायदा ही क्या, अगर मैं इस जगह को साफ और स्वास्थ्यप्रद बनानेके लिए उन्हे समझा न सकू?