पृष्ठ:Ramanama.pdf/७३

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६६ रामनाम है। लेकिन मेरा यह भी विश्वास है कि रामनाम ही सारी बीमारियोका सबसे बडा इलाज है । इसलिए वह सारे इलाजोसे उपर है। चारो तरफसे मुझे घेरनेवाली आग की लपटोके बीच तो भगवानमे जीती-जागती श्रद्धाकी मुझे सबसे बडी जरूरत है। वही लोगोको इस आगको बुझानेकी शक्ति दे सकता है। अगर भगवानको मुझसे काम लेना होगा, तो वह मुझे जिन्दा रखेगा, वर्ना मुझे अपने पास बुला लेगा । “आपने अभी जो भजन सुना है, उसमे कविने मनुष्यको कभी रामनाम न भूलनेका उपदेश दिया है। भगवान ही मनुष्यका एक आसरा है। इसलिए आजके सकटमे मै अपने-आपको पूरी तरह भगवानके भरोसे छोड देना चाहता हू और शरीर की बीमारीके लिए किसी तरहकी डॉक्टरी मदद नही लेना चाहता । " - नई दिल्ली, १८-१०-४७ ४२ रोजके विचार बीमारी मात्र मनुष्यके लिए शरमकी बात होनी चाहिये । बीमारी किसी भी दोषकी सूचक है। जिसका तन और मन सर्वथा स्वस्थ है, उसे बीमारी होनी ही नही चाहिये । --सेवाग्नाम, २६-१२-४४ विकारी विचार भी बीमारीकी निशानी है। इसलिए हम सब विकारी विचारसे बचते रहे । --सेवाग्राम, २७-१२-४४ विकारी विचारसे बचनेका एक अमोघ उपाय रामनाम है। नाम कठसे ही नही, किन्तु हृदय से निकलना चाहिये । -सेवाग्राम, २८-१२-'४४ व्याधि अनेक है, वैद्य अनेक है, उपचार भी अनेक है। अगर सारी व्याधिको एक ही माने और उसका मिटानेहारा वैद्य एक राम ही है जैसा समझे, तो हम बहुत-सी झझटोसे बच जाय । --सेवाग्राम, २९-१२-४४