2. मैक (Mach) के विचार के अनुसार जड़त्व का मान पिंडों के मध्य पारस्परिक क्रिया पर निर्भर करता है, जो आपेक्षिकता सिद्धान्त के समिकरणों में प्रथम सन्निकटन तक शामिल है; इन समीकरणों के अनुसार जड़त्व कम से कम आंशिक रूप से द्रव्यमानों के मध्य की पारस्परिक क्रियाओं पर निर्भर करता है। चूँकि यह मानना असंतोषजनक है कि जड़त्व आंशिक रूप से पारस्परिक क्रिया पर निर्भर करता है और आंशिक रूप से दिक् के स्वतंत्र गुणधर्म पर निर्भर करता है, इस कारण से मैक के विचार की प्रायिकता में वृद्धि होती है। लेकिन मैक का विचार दिक् में परिबंध एक परिमित ब्रह्माण्ड के लिए है और यह अर्ध-यूक्लिडीय अनन्त ब्रह्माण्ड के लिए नहीं है। ज्ञान-मीमांसा (epistemology) के दृष्टिकोण से यह अधिक संतोषजनक है कि अंतरिक्ष के यांत्रिक गुणधर्म पूरी तरह से पदार्थ द्वारा ज्ञात हों और ऐसा केवल दिक्-परिबद्ध ब्रह्माम्ड में ही संभव है।
3. अनन्त ब्रह्माण्ड केवल उसी अवस्था में सम्भव है यदि ब्रह्माण्ड के पदार्थ का माध्य घनत्व लुप्त हो जाये। यद्यपि ऐसी धारण तार्किक रूप से सम्भव है, इसकी प्रायिकता, ब्रह्माण्ड को एक परिमित माध्य घनत्व वाला मानने से कम है।