लेकिन हमारे उद्देश्य के लिए ज्यामिति की मूलभूत अवधारणाओं को प्राकृतिक वस्तुओं के साथ जोड़ना आवश्यक है; इस तरह जुड़ाव स्थापित किये बिना भौतिक विज्ञानी के लिए ज्यामिति बेकार है। भौतिक विज्ञानियों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि ज्यामिति की प्रमेय सत्य है या नहीं। इस दृष्टिकोण से यूक्लिडीय ज्यामिति केवल परिभाषाओं के तार्किक रूप से प्राप्त निष्कर्षों से कहीं अधिक की पुष्टि करती है जिसे निम्नलिखित सरल विचार से समझा जा सकता है।
दिक्काश के बिन्दुओं के मध्य दूरियाँ होंगी; इनके मध्य और निर्देशांकों के मध्य हम निम्नलिखित सम्बंध लिखते हैं
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इन समीकरणों से निर्देशांको को विलुप्त किया जा सकता है और इस तरह के विलोपन से की कम से कम समीकरण प्राप्त होंगी।[१] चूँकि मापन योग्य राशियाँ हैं और परिभाषा से एक दूसरे से स्वतंत्र हैं, के ये सम्बंध आवश्यक रूप से प्रागनुभविक नहीं हैं।
उपरोक्त चर्चा से यह स्पष्ट है कि रूपान्तरण समीकरण (3), (4) यूक्लिडीय ज्यामिति में मूलभूत सार्थकता है जिसमें एक कार्तीय निर्देश तंत्र से दूसरे में रूपान्तरण को समझा गया है। कार्तीय निर्देश तंत्र की विशेषता
- ↑ वास्तविकता में यहाँ समीकरण होंगी।